कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा
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यह आप समझिए कि प्रियंका गांधी आतंकी हमले में शहीद सैनिक को श्रद्धांजलि देने मेरठ क्यों गई थी? या फिर भीम आर्मी के युवा नेता चंद्रशेखर से मिलने क्यों गई? चंद्रशेखर तो अभी भी इलाज के दौर से गुजर रहे हैं और प्रियंका गांधी ने खुद साफ कर दिया कि उन्हें इस पर कोई राजनीति नहीं करनी है। पार्टी के महासचिव का कहना है कि इतने भर से बसपा प्रमुख मायावती की परेशानी साफ झलक रही है। यूपी के नेता और यूपीए सरकार में मंत्री रहे सूत्र का कहना है कि वह अभी बहुत कुछ नहीं कहना चाहते।
उन्होंने आगे जोड़ा, "यह केवल निजी चर्चा के लिए है, लेकिन मेरी सलाह है कि अन्य राजनीतिक दल राहुल गांधी की कांग्रेस को हल्के में न लें। वह इतना भी समझ लें चाहे रॉबर्ट वाड्रा को परेशान करने की मोदी सरकार की कोशिशें हों या राहुल-गांधी, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी को बदनाम करने की कोशिश, कांग्रेस ऐसी किसी कोशिश के आगे झुकने वाली नहीं है। हम 2019 में जोरदार चुनौती देने वाले हैं।"
तैयार हो रहा है प्रचार का प्लान
सूत्र का कहना है कि यूपी में चुनाव अभियान प्रचार की योजना तैयार हो रही है। पार्टी का राज्य में भरपूर फोकस रहेगा। कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया का ग्वालियर चंबल संभाग में प्रभाव है। बुंदेलखंड , पश्चिमी यूपी को लेकर वह कड़ी मेहनत कर रहे हैं। जल्द ही नतीजा दिखने लगेगा। बिहार, झारखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक को लेकर पार्टी ने अपनी लाइन मोटे तौर पर तय कर ली है। टिकट बंटवारे का काम चल रहा है। पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा समेत अन्य राज्यों में जल्द ही गतिविधियां तेज हो जाएंगी।
रॉबर्ट वाड्रा के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा
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कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने खुद को देश, देश के संविधान, मर्यादा, परंपरा, संवैधानिक संस्थान, निकाय, संगठन सबसे ऊपर मान लिया है। वह अपने भाषणों में दस बार खुद अपना नाम लेने वाली राजनीति की अनोखी शख्सियत हैं। जबकि देश का किसान, मजदूर, गरीब, युवा, उद्योग, व्यापारी सब परेशान है। रोजगार का संकट है और विदेश नीति, रक्षा नीति गंभीर दौर से गुजर रही है। कांग्रेस नेता के अनुसार प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष ने पिछले एक साल में एक के बाद एक कई मुद्दों को चुनाव को ध्यान में रखकर स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन सबकी हवा निकल गई।