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लोकसभा चनाव 2019: कांग्रेस के घोषणापत्र को लागू करना कितना आसान?

Wed, 03 Apr 2019 01:47 PM IST
Nilesh Kumar चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस के घोषणापत्र की बड़ी बातें - फोटो : Amar Ujala
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कांग्रेस ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। इसमें किसानों के लिए अलग सालाना बजट, ग़रीबों के खातों में सालाना 72,000 रुपए डालने सहित जन कल्याण के कई वादे किए गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इसमें कोई वादा झूठ पर आधारित नहीं है। उन्होंने नारा दिया- 'ग़रीबी पर वार 72 हजार' और कहा कि 'हमारा पहला कदम न्याय का कदम है।'
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राहुल गांधी ने कहा कि देश में 22 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं और कांग्रेस उन्हें जल्द से जल्द भरने की कोशिश करेगी। कांग्रेस अध्यक्ष ने रेलवे की तरह ही किसानों का एक अलग बजट पेश करने का वादा किया। कुल मिलाकर ये घोषणापत्र सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य के समान अधिकार की बात करता है। कई वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक मानते हैं कि ये घोषणापत्र सामाजिक न्याय की बात ठोस रूप से स्पष्ट करता है।
वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश कहते हैं कि वो 30 सालों से अलग-अलग सियासी पार्टियों के घोषणा पत्रों को देखते आये हैं लेकिन इस बार कांग्रेस के घोषणापत्र से बेहतर कोई घोषणापत्र उन्हें नहीं लगा। घोषणा पत्र जारी करने के समारोह में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम मौजूद थे। चिदंबरम घोषणा पत्र तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष हैं।
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हालांकि उर्मिलेश कहना है कि इस घोषणा पत्र में पी. चिदंबरम की छाप नहीं दिखती। उन्होंने कहा, "अगर इस मैनिफेस्टो में किसी की छाया नज़र आई तो वो हैं दुनिया के जाने-माने अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन। अमर्त्य सेन की भारत के लिए जो सोच है वो इसमें साफ झलकती है।" 

आम जनता पर इस घोषणापत्र का असर होगा? इस पर उर्मिलेश कहते हैं, "दक्षिण भारत में पार्टी के हालात बेहतर होने चाहिए क्योंकि वहां पढ़ाई-लिखाई अधिक है। वहां जाति से अधिक समुदाय महत्वपूर्ण है। सबसे बड़ी चुनौती राहुल गाँधी और उनकी पार्टी के लिए ये है कि क्या वो हिंदी बेल्ट में इस अच्छे मैनिफ़ेस्टो के पैगाम को लोगों तक पहुँचाने में सफल होंगे?''

''वो एक हद तक छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में ऐसा कर सकते हैं क्योंकि वहां वो सत्ता में हैं लेकिन क्या उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में उनके नेता और कार्यकर्ता जनता तक ये ऐलान ले जा पाएंगे। कांग्रेस के लिए ये एक बड़ी चुनौती होगी।"
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घोषणापत्र को लोगों तक पहुंचाना चुनौती

राहुल गांधी - फोटो : PTI

वरिष्ठ पत्रकार राधिका रामाशेषन भी इससे इत्तेफाक रखती हैं, ''इस घोषणापत्र के पैगाम को लोगों तक पहुँचाने के लिए कांग्रेस के पास पर्याप्त कार्यकर्ता नहीं हैं। दूसरी ओर बीजेपी एक काडर वाली पार्टी है। वो अपनी पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। कांग्रेस के कार्यकर्ता कितने सक्षम हैं और वो लोगों तक इसके पैग़ाम को ले जा सकेंगे ये देखना होगा। "

राधिका आगे कहती हैं, ''कांग्रेस पार्टी ने अपने सॉफ्ट हिंदुत्व को अलग रखकर अपनी मुख्य विचारधारा को सामने रख कर ये घोषणापत्र तैयार किया है। न्याय उनकी प्रमुख घोषणा है। भारत आज भी प्रमुख रूप से गांवों में रहता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था लचर है। राहुल गांधी ने किसानों को राहत देने, युवाओं को रोज़गार देने और मनरेगा के अंतर्गत 100 दिनों से बढ़ा कर 150 दिन करने की घोषणा से ये बताना चाहा है कि उनकी प्राथमिकता ग्रामीणों को मजबूत करना है।"


राहुल गांधी और घोषणापत्र बनाने वाली समिति के अध्यक्ष पी चिदंबरम के अनुसार घोषणापत्र आम लोगों की राय जानने के बाद तैयार किया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि इसमें वही बातें शामिल की गई हैं जो पूरी की जा सकें।

राधिका का मानना है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो इसमें से कुछ वादों को इन्हें जल्द पूरा करना होगा। उनके अनुसार कोई पार्टी सत्ता में आने के बाद सभी वादे पूरे नहीं कर सकती लेकिन आज के घोषणापत्रों में मुख्य वादों को पूरा किया जा सकता है।

क्या बीजेपी अपना घोषणापत्र कांग्रेस को ध्यान में रख कर जारी करेगी? उर्मिलेश कहते हैं, "मुझे लगता है कि बीजेपी हिन्दू-मुस्लिम, भारत-पाकिस्तान, सुरक्षा जैसे मुद्दों को सामने रख कर ही चुनाव लड़ेगी।"

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