वरिष्ठ पत्रकार राधिका रामाशेषन भी इससे इत्तेफाक रखती हैं, ''इस घोषणापत्र के पैगाम को लोगों तक पहुँचाने के लिए कांग्रेस के पास पर्याप्त कार्यकर्ता नहीं हैं। दूसरी ओर बीजेपी एक काडर वाली पार्टी है। वो अपनी पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। कांग्रेस के कार्यकर्ता कितने सक्षम हैं और वो लोगों तक इसके पैग़ाम को ले जा सकेंगे ये देखना होगा। "
राधिका आगे कहती हैं, ''कांग्रेस पार्टी ने अपने सॉफ्ट हिंदुत्व को अलग रखकर अपनी मुख्य विचारधारा को सामने रख कर ये घोषणापत्र तैयार किया है। न्याय उनकी प्रमुख घोषणा है। भारत आज भी प्रमुख रूप से गांवों में रहता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था लचर है। राहुल गांधी ने किसानों को राहत देने, युवाओं को रोज़गार देने और मनरेगा के अंतर्गत 100 दिनों से बढ़ा कर 150 दिन करने की घोषणा से ये बताना चाहा है कि उनकी प्राथमिकता ग्रामीणों को मजबूत करना है।"
राहुल गांधी और घोषणापत्र बनाने वाली समिति के अध्यक्ष पी चिदंबरम के अनुसार घोषणापत्र आम लोगों की राय जानने के बाद तैयार किया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि इसमें वही बातें शामिल की गई हैं जो पूरी की जा सकें।
राधिका का मानना है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो इसमें से कुछ वादों को इन्हें जल्द पूरा करना होगा। उनके अनुसार कोई पार्टी सत्ता में आने के बाद सभी वादे पूरे नहीं कर सकती लेकिन आज के घोषणापत्रों में मुख्य वादों को पूरा किया जा सकता है।
क्या बीजेपी अपना घोषणापत्र कांग्रेस को ध्यान में रख कर जारी करेगी? उर्मिलेश कहते हैं, "मुझे लगता है कि बीजेपी हिन्दू-मुस्लिम, भारत-पाकिस्तान, सुरक्षा जैसे मुद्दों को सामने रख कर ही चुनाव लड़ेगी।"