भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 24 मार्च और 26 मार्च को पूरे देश में प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में विजय संकल्प सभा का आयोजन करेगी। इस कार्यक्रम के तहत भाजपा के सभी शीर्ष नेता अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों में जायेंगे। वे पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच केंद्र सरकार के अब तक के किये गये कार्यों को जनता के समक्ष रखेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य लोकसभा चुनाव के ठीक पहले कार्यकर्ताओं को उन मुद्दों की जानकारी देना है जिनके जरिये पार्टी सत्ता में वापसी की योजना बना रही है।
एक भाजपा नेता के मुताबिक 24 मार्च तक पार्टी अपने सभी टिकटों की घोषणा कर देगी। इसके बाद पार्टी के सघन प्रचार अभियान का दौर शुरू हो जायेगा। विजय संकल्प सभा का आयोजन इसी प्रचार रणनीति का एक हिस्सा है। इस कार्यक्रम की तरह केंद्र से लेकर बूथ स्तर तक प्रचार के लिए कई कार्यक्रम बनाये गये हैं।
भाजपा ने पिछले चुनाव में बेहद आक्रामक प्रचार रणनीति अपनाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार हुई हाई टेक रैलियों के आलावा सोशल मीडिया के जबर्दस्त प्रयोग ने भाजपा को लीड लेने में मदद की थी और अंततः उसने बड़ी जीत हासिल की थी। पार्टी इस चुनाव में भी उसी तरह की प्रचार रणनीति अपनाने की तरफ आगे बढ़ती दिख रही है।
वर्ष 2014 के आम चुनाव में प्रशांत किशोर को भाजपा की प्रचार रणनीति का शिल्पी बताया गया था जिन्होंने ‘चाय पे चर्चा’ कार्यक्रम के तहत पूरे देश में भाजपा को चर्चा के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया था। क्या इस बार भाजपा को प्रशांत किशोर की कमी खलेगी, इस सवाल पर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कोई व्यक्ति एक पार्टी को चुनाव जिताने में कभी सक्षम नहीं होता है। किसी की तकनीकी बात को जनता तक पहुंचाने में मददगार अवश्य हो सकती है, लेकिन सफलता तभी मिलती है जब कार्यक्रम में जमीनी सच्चाई होती है। नेता के मुताबिक, इस चुनाव में किसी रणनीतिज्ञ की कमी भाजपा को नहीं महसूस होगी क्योंकि पार्टी ने जनता को सरकार के कामों की जानकारी देने में कोई कमी नहीं रख छोड़ी है।