बीजेपी कांग्रेस (फाइल फोटो)
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चौथे चरण में महाराष्ट्र की 17 सीटों और राजस्थान की 13 सीटों पर भाजपा की सांस अटकी है। यूपी की 13, मध्यप्रदेश 06, झारखंड की तीन, जम्मू की दो सीटों में का 99 प्रतिशत सीटों पर 2014 में भाजपा का कब्जा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इन सीटों में हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है। वहीं भाजपा के रणनीतिकारों को यहां से कुछ हिस्सा खोने खतरा साफ दिखाई पड़ रहा है।
यूपी में गठबंधन ने मुसीबत बढ़ाई है तो मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, में कांग्रेस के प्रत्याशी टक्कर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर मोदी के सामानांतर या आस-पास कोई नहीं है, लेकिन तमाम अन्य समीकरण उठ खड़े हुए हैं। बिहार, झारखंड में भी चुनाव 2014 वाला नहीं बल्कि 2019 वाला है। भाजपा को सुखदायी खबर की उम्मीद केवल पश्चिम बंगाल से है। अब यहां कितना सीटों में फायदा होगा, इसका आकलन जारी है।
आगे क्या है?
पांचवें चरण में 06 मई को बिहार पांच, झारखण्ड की 04, मध्यप्रदेश की 08, राजस्थान की 12, जम्मू-कश्मीर की दो, यूपी 14 और पश्चिम बंगाल की सात सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें से 2014 में केवल तीन सीट कांग्रेस के पास, 01 पीडीपी और सात सीटें तृणमूल कांग्रेस के पास थीं। शेष सभी सीटें बीजेपी और उसके घटक दलों ने जीती थीं। 39 सीटें अकेले भाजपा के खाते में आई थीं। इस बार रालोसपा भाजपा के साथ एनडीए में नहीं हैं। रालोसपा ने बिहार में सीतामढ़ी सीट जीतने में सफलता पाई थी।
छठवां चरण का चुनाव और दिलचस्प होगा। 59 सीट पर 12 मई को मतदान होगा। 2014 में 45 सीट भाजपा, एक अपना दल, लोजपा एक और चार अकाली दल ने जीती थी। इस तरह से एनडीए के खाते में कुल 51 सीटें एनडीए के पाले में थीं। कांग्रेस को एक सीट, तृणमूल कांग्रेस को 08 और समाजवादी पार्टी को एक सीट पर सफलता मिली थी। इस बार छठवें चरण में दिल्ली की सात, हरियाणा की सभी दस सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
हरियाणा से भाजपा को सात और दिल्ली से सभी सात सीटें मिली थीं। इस बार यहां मुकाबले की स्थिति है। सातवां चरण भी भाजपा का ही था। झारखंड की राजमहल (झारखंड मुक्तिमोर्चा), दुमका (झामुमो), बिहार की नालंदा (जदयू), जहानाबाद और काराकाट (रालोसपा) के पास थी। तब रालोसपा एनडीए में था, अब यूपीए में है। जदयू बाहर थी, अब एनडीए में है।
नौ सीटों पर तृणमूल कांग्रेस जीती थी। बाकी सभी सीटें भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास थीं। इन 59 सीटों में से 33 पर अकेले भाजपा का कब्जा था। चार आम आदमी पार्टी के खाते में चली गई थीं। कांग्रस को तीन सीटों से संतोष करना पड़ा था। चार सीट अकाली दल ने जीती थीं। इस बार पंजाब की सभी 13, चंडीगढ़ की एक, हिमाचल की चार सीटों पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।