गौरतलब है कि मालवा-निमाड़ की आठों सीटों पर 19 मई को मतदान होना है। इस अंचल में भाजपा के उम्मीदवार खासकर राष्ट्रवाद के मुद्दे की पृष्ठभूमि में नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों के नाम पर वोट मांग रहे हैं। वे इस किसान बहुल क्षेत्र में आयोजित सभाओं में मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए बराबर यह आरोप भी लगा रहे हैं कि 15 साल बाद सूबे की सत्ता में आयी कांग्रेस अन्नदाताओं का कर्ज माफ करने का अहम चुनावी वादा निभाने में नाकाम रही है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला भाजपा के इस आरोप को नकारते हुए कहते हैं कि सबको पता है कि कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के फौरन बाद किसान कर्ज माफी की सरकारी प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इस मुद्दे को लेकर भाजपा मतदाताओं के बीच भ्रम फैला रही है।
मालवा-निमाड़ की ही देवास सीट से उम्मीदवारी के लिये भाजपा ने एकदम नये चेहरे के रूप में सामने आये महेंद्र सिंह सोलंकी पर दांव खेला है। सोलंकी न्यायाधीश के पद से इस्तीफा देकर चुनावी राजनीति में उतरे हैं। वर्ष 2014 के पिछले लोकसभा चुनावों में देवास सीट से मनोहर ऊंटवाल भाजपा सांसद के रूप में निर्वाचित हुए थे। पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान ऊंटवाल आगर सीट से चुनाव लड़कर पार्टी के विधायक चुने गये थे। इसके बाद बतौर सांसद अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
रतलाम से निवर्तमान सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया को टक्कर देने के लिये भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक जीएस डामोर को इस सीट से लोकसभा चुनावों का टिकट दिया है।बहरहाल, मालवा-निमाड़ की मंदसौर और खंडवा सीटों के चुनावी उम्मीदवारों में भाजपा ने वर्ष 2014 के पिछले लोकसभा चुनावों के मुकाबले कोई परिवर्तन नहीं किया है। दोनों सीटों पर निवर्तमान सांसदों क्रमश: सुधीर गुप्ता और नंदकुमार सिंह चौहान पर इस बार भी भरोसा जताया गया है। गुप्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि वाले भाजपा नेता हैं, जबकि चौहान पार्टी की प्रदेश इकाई के पूर्व अध्यक्ष हैं।