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1957 लोकसभा चुनाव: कांग्रेस को मिला था प्रचंड बहुमत, वाजपेयी पहली बार पहुंचे थे संसद

Tue, 05 Mar 2019 03:22 PM IST
Prabudhh Jain ललित फुलारा, चुनाव डेस्क, अमर उजाला
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1957 के आम चुनाव का इतिहास - फोटो : Amar Ujala
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62 साल पहले भारत में दूसरा लोकसभा चुनाव हुआ। चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत हुई और पंडित जवाहरलाल नेहरू फिर से प्रधानमंत्री बने। कांग्रेस ने पहले आम चुनाव के मुकाबले सात सीटें ज्यादा जीतीं। यह वह दौर था जब महिलाएं घूंघट और पुरुष कुर्ते-पैजामे में मतदान केंद्रों के बाहर बैलेट पेपर के जरिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए खड़े नजर आते थे। न ही आज की तरह तड़क-भड़क थी और न ही इस कदर धनबल का जोर।

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चुनाव में एक तरफ कांग्रेसी, दूसरी तरफ वामपंथी- समाजवादी और दक्षिणपंथी पार्टियां- भारतीय जनसंघ, अखिल भारतीय हिंदू महासभा एवं अखिल भारतीय राम राज्य परिषद अपने-अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में डटी थीं। भारतीय जनसंघ इस चुनाव में भी उस तरह कमाल नहीं कर पाई और उसके खाते में पहले आम चुनाव से सिर्फ एक सीट ही ज्यादा आई। जबकि कांग्रेस का वोट शेयर जहां पहले आम चुनाव में 45 फीसदी था वहीं दूसरे लोकसभा चुनाव में यह बढ़कर 47.8 फीसदी हो गया। दूसरा लोकसभा चुनाव करीब साढ़े तीन महीने तक चला। यह चुनाव 24 फरवरी से 9 जून के बीच संपन्न हुआ। 
 

सिर्फ दो ही पार्टियां छू पाईं दहाई का आंकड़ा

1957 के दूसरे आम चुनाव में सिर्फ दो ही पार्टियां दहाई का आंकड़ा छू पाईं। ये दो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी थीं। उस वक्त भारत में  13 राज्य और 4 केंद्र शासित प्रदेश थे। यह चुनाव इन 17 राज्यों के 403 निर्वाचन क्षेत्रों की 494 सीटों  पर हुआ था। चुनाव में 16 पार्टियों और कई सौ निर्दलीय उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था।

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इसे भी पढ़ें- 67 साल पहले हुआ था आजाद भारत का पहला लोकसभा चुनाव, 53 पार्टियां उतरी थीं मैदान में

कांग्रेस ने जीतीं 371 सीटें

भारत के दूसरे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 371 सीटें जीतीं। चुनाव में कांग्रेस के बाद निर्दलियों को बोलबाला रहा।  542 निर्दलियों ने दूसरा आम चुनाव लड़ा और इनमें से 42 के सिर पर जीत का सेहरा बंधा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 111 प्रत्याशी मैदान में उतारे और इनमें से सिर्फ 27 प्रत्याशियों ने ही जीत का स्वाद चखा। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने मैदान में 194 उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से 19 ने मैदान फतह किया। भारतीय जनसंघ ने 133 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे जिनमें से सिर्फ 4 ही जीत दर्ज कर सके।

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पंडित नेहरू की यह बात सही साबित हुई और 39 साल बाद 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने।
भारत के दूसरे लोकसभा चुनाव में गणतंत्र परिषद पार्टी ने 15 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे जिनमें से 7 ने जीत हासिल की। फॉरवर्ड ब्लॉक ( मार्क्सिस्ट) पार्टी के 5 में से  2 उम्मीदवारों ने चुनाव जीता। जबकि प्रजा सोशलिस्ट पार्टी इस चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल पाई। पार्टी ने 3 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। दूसरे आम चुनाव में अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने 1 सीट जीतीं। जबकि  अखिल भारतीय राम राज्य परिषद के खाते में एक भी सीट नहीं आई।

45 महिला प्रत्याशियों में से 22 ने जीता चुनाव, वाजपेयी पहली बार पहुंचे संसद
दूसरे लोकसभा चुनाव में 45 महिला प्रत्याशी मैदान में थीं जिनमें से 22 ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में ही अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार जनसंघ पार्टी के टिकट पर संसद पहुंचे। वाजपेयी उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे और प्रधानमंत्री नेहरू उनके भाषण कला के इतने मुरीद हुए कि कह डाला कि यह युवा एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा। पंडित नेहरू की यह बात सही साबित हुई और 39 साल बाद 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। वाजपेयी मथुरा से राजा महेंद्र प्रताप से चुनाव हारे लेकिन बलरामपुर सीट ने उन्हें संसद की दहलीज पर पहुंचा दिया। यहां से अटल बिहारी वाजपेयी ने कांग्रेस के नेता हैदर हुसैन को पराजित किया था।

चुनाव के बाद 18 अप्रैल 1957 को तीसरे नेहरू मंत्रिमंडल का गठन हुआ। गृहमंत्री की जिम्मेदारी पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने संभाली। विदेश मंत्रालय का प्रभार जवाहरलाल नेहरू ने अपने ही पास रखा। वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी थिरुवलु थातु कृष्णामाचारी के पास थी। बाद में 13 मार्च 1958 में मोरारजी देसाई ने वित्त मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।
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