लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान 8+1 के फार्मूले पर मान जाएंगे। लोजपा को छह सीट बिहार में, एक उत्तरप्रदेश में और एक सीट बिहार में चाहिए। वह खुद के लिए राज्यसभा सीट चाहते है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से चर्चा के बाद राम विलास पासवान और पुत्र चिराग पासवान ने दृढ़ता के साथ यही मन बनाया है। वह 2014 में सात सीट पर लड़े थे, छह जीते थे। आगे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को तय करना है। लोजपा नेतृत्व को यकीन है कि रविवार तक इसका पटाक्षेप हो जाएगा।
पहले था 5+1
जब उपेन्द्र कुशवाहा एनडीए में थे तब भाजपा के साथ बिहार को लेकर 5+1 (पांच लोकसभा और एक राज्यसभा) पर सहमति बन गई थी। यह प्रस्ताव भाजपा से आया था। तब राम विलास ने चिराग को मना लिया था। लेकिन उपेन्द्र के बाहर जाने के बाद नीतीश और अमित शाह की बैठक के बाद कोई संवाद न होने पर राम विलास और चिराग अहमियत न मिलने से नाराज हो गए। नीतीश कुमार और भाजपा कि तरफ से मीडिया को बताना कि दोनों बराबरी पर चुनाव लड़ेंगे। शेष जैसे चल रहा था। इस संदेश से पिता-पुत्र अंदर से सुलग कर रह गए। अब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के सही समय देखकर पासवान पिता पुत्र ने अमित शाह के सामने बात रख दी है।
अमित शाह खुद आए
लोजपा के सूत्र के अनुसार कल संसद भवन में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह खुद चलकर चिराग पासवान के पास आए। बात की। चिराग ने कहा कि मिल बैठकर इसका हल निकलेगा। भाजपा महासचिव और बिहार के प्रभारी भूपेन्द्र यादव भी चिराग से मिले। इसके बाद राम विलास पासवान और चिराग अमित शाह के पास गए। चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि बिहार और पार्टी स्तर पर फीडबैक लेने के बाद अगले एक दिन में अमित शाह निर्णय लेंगे।
बिहार विधान सभा की दिलाई याद
लोजपा नेता ने बिहार विधानसभा चुनाव का हवाला दिया। कहा तब राम विलास ने भाजपा अध्यक्ष के प्रस्ताव पर सहमति जता दी थी। 2010 के चुनाव में 73 सीट पर लड़ने वाली लोजपा उपेन्द्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी के एनडीए में आने के कारण 48 सीट पर लड़ने के लिए राजी हो गई थी। आशय था कि जीतने वाली सीट ले ली जाए। गिनाने वाली छोड़ दी जाए। सहमति बन गई। लेकिन बाद में लोजपा की जीत सकने वाली सीटें कुछ भाजपा ने ले ली। कुछ मांझी और कुछ कुशवाहा की पार्टी को मिल गई।
कुशवाहा की अच्छी सीटें मांझी की हम और भाजपा को मिल गई। लोजपा का कहना है कि भाजपा के अति आत्मविश्वास और घालमेल में सब धरा का धरा रह गया। चुनाव नतीजे विपरीत आ गए। यही भाजपा ने पांच राज्यों के चुनाव में किया। मप्र में लोजपा अपने कॉडर का हवाले देकर कुछ सीट मांगती रह गई और भाजपा ने कान नहीं दिया।
चिराग आहत हैं
राम विलास पासवान को मीडिया मे मौसम विज्ञानी कहे जाने से चिराग आहत हैं। पासवान भी दुखी हैं। आखिर यह बदनामी कौन करा रहा है। चिराग ने अमित शाह को साफ बताया कि वह ऐसे पाला नहीं बदलते। जब उनका, उनकी पार्टी और पार्टी के नेता का यथोचित सम्मान नहीं होता तो मजबूरन ऐसा करना पड़ता है। तब लोजपा अपना रास्ता देख लेती है।
हवा का रुख भांप चुके हैं
पांच राज्यों के चुनाव के बाद राम विलास पासवान और चिराग हवा का रुख भांप चुके हैं। दोनों को एहसास है कि बिहार में उनको महत्व देना भाजपा और जद(यू) दोनों की मजबूरी है। नहीं देते तो कुशवाहा के रास्ते पर चलना बुरा नहीं है। तेजस्वी का राजद, राहुल की कांग्रेस, मांझी की उपेन्द्र की रालोसपा के साथ खड़े होकर बिहार में अच्छी सफलता मिल सकती है। अल्पसंख्यक भी साथ देगा। दलित और अन्य जातियां मान बढ़ा देंगी, लेकिन पहले भाजपा अपनी लाइन तय करे।