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लोकसभा चुनाव 2019 : सुप्रीम कोर्ट की शरण में जा सकती है चुनाव आयोग से निराश कांग्रेस

Sat, 27 Apr 2019 05:35 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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लोकसभा चुनाव का सफर आधे से ज्यादा तो बीत ही चुका है, मगर चक्रव्यूह की रचना अभी यूं ही जारी है। सत्ता और विपक्ष, दोनों ओर से चक्रव्यूह रचे जा रहे हैं। कभी कांग्रेस अपने चक्रव्यूह में भाजपा को घेरने का प्रयास करती है तो कभी भाजपा प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को फंसाने के लिए दांव चलती है। इस खेल में एक चक्रव्यूह ऐसा भी रहा, जिसे भेदने में कांग्रेस नाकाम रही या यूं कहिये कि कांग्रेस उसे समझ ही नहीं पाई। 

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नतीजा, समय निकल गया और अब हाथ मलने के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा। मोदी-शाह की जोड़ी के खिलाफ आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर कांग्रेस पार्टी करीब 15 बार आयोग के पास पहुंची। हर बार कार्रवाई का भरोसा लेकर वापस चली गई। इसी भरोसे में समय इतना आगे निकल गया कि अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का भी कोई फायदा नजर नहीं आ रहा। हालांकि कांग्रेस ने कहा कि वह सोमवार को चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे।

बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेता पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन बाबत चुनाव आयोग से कई बार शिकायत की है। पार्टी नेता अहमद पटेल, जयराम रमेश, अभिषेक मनु सिंघवी और रणदीप सुरजेवाला आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े करीब दो दर्जन मामले चुनाव आयोग के समक्ष रखे चुके हैं। हर बार आयोग से एक ही जवाब मिलता कि हम कार्रवाई करेंगे। अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि आयोग ने कुछ मामलों में कार्रवाई की भी है। 

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कांग्रेस का आरोप, आयोग से शिकायत करो तो वह परेशान हो जाता है

हालांकि ये मामले छोटे नेताओं से संबंधित हैं। चुनाव आयोग को जब मोदी-शाह की शिकायत दी जाती है तो वह परेशान सा हो जाता है। हमारे प्रतिनिधिमंडल को आयोग यह आश्वासन दे देता हैं कि इस मामले में भी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन बाद में जब नतीजा देखते हैं तो चुप्पी के अलावा कुछ नहीं दिखता। सिंघवी के मुताबिक, मोदी और शाह के खिलाफ चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के तीन तरह के मामले चुनाव आयोग को सौंपे हैं। इनमें मनभेद या विभाजन के लिए घृणात्मक या अपशब्दों का इस्तेमाल, वीर जवानों के गौरव का राजनीतिकरण और वोट डालने से पहले और उसके बाद में रैली करना या भाषणबाजी, आदि शामिल हैं।

मोदी ने 20 मार्च को सेना का नाम लेकर 5 अप्रैल को वर्धा में भी सेना का नाम लिया। 12 अप्रैल को मोदी ने नांदेड में और अमित शाह ने नागपुर में घृणात्मक बयान दिया। इसके बाद 12 अप्रैल को ही मोदी ने लातूर में सेना के गौरव का इस्तेमाल, 16 अप्रैल को घृणात्मक बयान, 22 अप्रैल को गुजरात में सेना पर टिप्पणी और 23 अप्रैल को गांधीनगर में मोदी ने आचार संहिता का उल्लंघन किया। 23 अप्रैल को शाह ने और 24 अप्रैल को मोदी ने फिर से सेना के नाम को राजनीति में घसीटा। इन सभी मामलों की शिकायत चुनाव आयोग से की गई थी। 
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कांग्रेस पार्टी का 'इंतजार'... यही सबसे बड़ी चूक हो गई

यह सोचकर कि चुनाव आयोग मोदी-शाह के खिलाफ कोई एक्शन लेगा, कांग्रेस पार्टी इंतजार करती रही। करीब 25 दिन के इस इंतजार में आधे से ज्यादा चुनाव निकल गया। हालांकि पार्टी द्वारा चुनाव आयोग को बराबर शिकायत दी जाती रही। अब 29 अप्रैल को चौथे चरण का चुनाव है, मगर चुनाव आयोग कुछ करेगा, कांग्रेस को ऐसी संभावना नजर नहीं आ रही। कांग्रेस पार्टी अब चुनाव आयोग को कोस रही है। उसे एहसास हो गया कि भाजपा अपने चक्रव्यूह में कामयाब हो गई। अब एक आखिरी विकल्प सुप्रीम कोर्ट जाने का बचता है। 

अभिषेक मनु सिंघवी कहते हैं कि सोमवार को चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। वे साथ ही यह भी कहते हैं कि अब इसका फायदा भी क्या होगा। जब तक सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई शुरू होगी और कोई फैसला आएगा, तब तक नई सरकार का गठन हो चुका होगा। खैर, हम कोर्ट तो जाएंगे ही। हमने वे सारे सबूत एकत्रित कर लिए हैं, जिनमें यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पीएम मोदी ने एक जैसी बातें कही हैं। लग रहा है कि मोदी-शाह के खिलाफ कार्रवाई की बात सोचना भी आयोग के वश में नहीं है। ये दोनों नेता चुनावी मौसम में आयोग की चुप्पी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं।
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