तीनों सीटों पर जीत-हार का है यह समीकरण
रोहतक सीट पर भाजपा ने पूर्व सांसद एवं कांग्रेस नेता रहे अरविंद शर्मा को टिकट दिया है। शर्मा ने अभी हाल ही में भाजपा ज्वाइन की है। रोहतक में 2014 के दौरान दीपेंद्र ने नौ हल्कों में से सात में जीत दर्ज कराई थी। केवल बहादुरगढ़ और कोसली हल्के से हुड्डा को हार का सामना करना पड़ा था। ये दोनों शहरी इलाके हैं। इस बार उनका प्रभाव थोड़ा कम हुआ है, खासतौर से शहरी इलाके रोहतक, कोसली और बहादुरगढ़ में उनकी स्थिति कुछ कमजोर बताई जा रही है।
बता दें कि इस सीट पर किसी दूसरी पार्टी ने कोई बड़ा जाट नेता नहीं खड़ा किया है। इससे जाट वोटबैंक नहीं बंटेगा। यह फायदा दीपेंद्र को मिल सकता है। सोनीपत सीट पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को न तो भाजपा प्रत्याशी रमेश कौशिक जो कि मौजूदा सांसद हैं और न ही जजपा के दिग्विजय चौटाला टक्कर दे पा रहे हैं। यहां पर जोटवोट बैंक हुड्डा और चौटाला में ज़्यादा नहीं बंटेगा। हिसार सीट पर केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने अपने बेटे ब्रजेंद्र सिंह को टिकट दिलाई है। यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला है।
भाजपा के ब्रजेंद्र सिंह जाट हैं। उन्हें भरोसा है कि जाट मतदाता तो उन्हें वोट देंगे ही, साथ ही भाजपा का परंपरागत वोटर भी उनके पाले में आ जाएगा। इससे उनकी जीत आसान होगी। दूसरी ओर, दुष्यंत चौटाला जो कि यहां से मौजूदा सांसद भी हैं, वे जाट मतदाताओं के सहारे मैदान में हैं। तीसरे नंबर पर भव्य बिश्नोई हैं, जो कि पूरी तरह से गैर-जाटों के वोटों पर निर्भर हैं। अगर दुष्यंत और ब्रजेंद्र के बीच जाट वोट पूरी तरह बंटते हैं और भाजपा के वोटर ब्रजेंद्र को स्पोर्ट नहीं करते तो ही बिश्नोई की राह कुछ आसान हो सकेगी।