क्या है समीकरण
सुल्तानपुर में कोई 17 लाख, 72 हजार 251 मतदाता हैं। इनमें से 30-39 वर्ष के मतदाता करीब 5.5 लाख हैं। यह वर्ग राजनीति में खासी दिलचस्पी लेने वाला भी है और इस वर्ग में प्रधानमंत्री मोदी के समर्थकों की संख्या ठीकठाक है। मेनका गांधी के समर्थक इससे काफी राहत की सांस ले रहे हैं। 20-29 साल के मतदाताओं की संख्या भी कोई 4.17 लाख है। 3.60 लाख मतदाता 40-49 वर्ष के हैं।
भाजपा की जीत का चुनावी गणित जोड़ने वाले राम सुभग सिंह कहते हैं जिस जिले का आधे से अधिक मतदाता 20-39 आयु वर्ग का है, वहां भाजपा को चिंता करने की जरूरत नहीं है। हालांकि जातिगत राजनीतिक समीकरण की चर्चा छेड़ने पर राम सुभग सिंह इस पर कोई तर्क वितर्क नहीं करना चाहते। वह इस बारे में केवल इतना कहते हैं कि मेनका के पक्ष में वरुण गांधी की मशीनरी (प्रचार के लिए समर्थक) लगे हैं। वरुण गांधी ने सुल्तानपुर में ठीक-ठाक सोशल नेटवर्किंग कर रखी है और इसका भाजपा को फायदा मिलेगा। वैसे भी मेनका गांधी स्व. संजय गांधी की पत्नी भी हैं।
प्रियंका का प्रचार गठबंधन की जीत
सुल्तानपुर राजनीति में दबदबा रखने वाला जिला है। लोगों की राजनीति में दिलचस्पी और समझ गजब की है। ओंकार मिश्रा कहते हैं कि सुल्तानपुर में जातिगत समीकरण प्रभावी है। मध्य उ.प्र. से पूर्वांचल तक अब जाति ही चलेगी। ओंकार और चंचल का कहना है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी कांग्रेस के प्रत्याशी को भले न जिता पा रही हों, लेकिन भाजपा को तगड़ा नुकसान पहुंचा रही हैं। अखंड प्रताप सिंह भी ओंकार और चंचल की बात का समर्थन करते हैं।
दीपक चौरसिया का कहना है कि प्रियंका के प्रचार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख को तगड़ा बट्टा लग रहा है। वह किसानों, युवाओं, लोगों का जरूरी मुद्दा उठाकर प्रधानमंत्री की छवि को बेअसर करने में योगदान दे रही हैं। इसका सीधा फायदा गठबंधन के प्रत्याशी को मिल रहा है। कमलेश यादव इस पर तंज भी कसते हैं। कमलेश का कहना है कि कांग्रेस महासचिव ने अपनी पार्टी को वोट कटवा पार्टी बता रखा है।