केंद्र में सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी अपने संसदीय इतिहास में पहली बार सबसे अधिक लोकसभा की सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। पार्टी ने अभी तक देश की 543 लोकसभा सीटों में से 408 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। भाजपा ने 2014 का लोकसभा चुनाव 428 संसदीय सीटों पर लड़ा था। इसबार ये आंकड़ा 438 हो सकता है। भाजपा के एक नेता ने कहा है कि लोकसभा की 30 और सीटों पर भाजपा अपने उम्मीदवारों को उतारेगी।
भाजपा ने अभी केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नहीं की है। कहा जा रहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और दिल्ली भाजपा नेताओं के बीच उम्मीदवारों को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच चल रही गठबंधन की बात को लेकर भी भाजपा अपने पत्ते अभी नहीं खोल रही है। जबकी उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से बची आठ लोकसभा सीटों पर भी उम्मीदवारों के नामों की घोषणा भाजपा ने नहीं किया है। वहीं, मध्यप्रदेेश की इंदौर और भोपाल सहित आठ लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित होने बाकी हैं।
भाजपा नेता के मुताबिक अगले सप्ताह पंजाब की तीन सीट, जहां भाजपा शिरोमणि अकाली दल के साथ लड़ रही है, दो सीट हरियाणा और राजस्थान की एक लोकसभा सीट पर उम्मीदवारों के नाम का एलान कर सकती है। भाजपा पहली बार आंधप्रदेश और तेलंगाना की सभी 42 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने जा रही है। 2014 के चुनाव में यहां भाजपा चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी के साथ गठबंधन में केवल 12 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। बिहार, असम और झारखंड में गठबंधन होने के बाद भाजपा को सीटें वहां कम मिली हैं। लेकिन आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में अकेले लड़ने की वजह से इस चुनाव में भाजपा सबसे अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने जा रही है।
मालूम हो कि भाजपा ने 2009 के लोकसभा चुनाव में 433 जबकी 2004 में 364 और 1999 के लोकसभा चुनाव में 339 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटों की संख्या 438 होने की पूरी संभावना है, जिसपर वो अपने उम्मीदवार उतारेगी। भाजपा अब गठबंधन के साथ-साथ खुद की जमीन भी तैयार करने में जुट गई है। वो अपने संगठन को उस राज्य में बढ़ा रही है, जहां वो पहले कभी मजबूत नहीं रही है।