Gopinath Munde Family (File Photo)
- फोटो : Social Media
बीते 10 सालों के दौरान हुए तीन चुनावों से यह सीट भाजपा के पास है। 2009 लोकसभा चुनाव में एनसीपी नेता रमेश बाबूराव को हराकर गोपीनाथ मुंडे यहां से जीते थे। 2014 में एक बार फिर उन्होंने जीत हासिल की और नरेंद्र मोदी की सरकार में कैबिनेट गठन के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री की शपथ ली। दुर्योगवश नौ दिन बाद ही एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। इसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी बेटी प्रीतम जीतीं और सांसद बनीं। बीड लोकसभा के इतिहास में यह उनकी रिकॉर्ड मतों सें जीत थी।
छह में से पांच विधानसभा पर भाजपा का कब्जा
बीड लोकसभा क्षेत्र के तहत छह विधानसभा सीटें आती हैं। गेवराई, माजलगांव, आष्टी, कैज और परली विधानसभा सीटों पर भाजपा का वर्चस्व है, जबकि एकमात्र विधानसभा सीट बीड में एनसीपी विधायक हैं। पांच विधानसभा सीटों पर कब्जा होने के कारण भाजपा यहां से ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल करना चाहेगी। वहीं, एनसीपी भी एक बार फिर से 2009 से पहले वाला अपना इतिहास दोहराना चाहेगी।
इसके लिए कांग्रेस के साथ मिलकर एनसीपी ने खूब मेहनत भी की है। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार भी यहां 'वोटकटवा' की भूमिका में होंगे। 26 में से कुछ उम्मीदवार भाजपा का वोट काटेंगे तो वहीं कुछ एनसीपी का वोट फीसदी कम करेंगे। फिलहाल यहां चुनाव प्रचार थम चुका है और पूरी ताकत झोंक चुकी भाजपा और एनसीपी की निगाह अपने पक्ष में ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल करने की है।