भाजपा की घबड़ाहट और कांग्रेस की चाल है
आम आदमी पार्टी के सक्रिय जमीनी कार्यकर्ता राजेश चौधरी ने मनीष सिसोदिया को जीत दिलाने में कड़ी मेहनत की थी। राजेश काफी सक्रिय हैं। राजेश का कहना है कि 12 मई आने दीजिए, कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजेश इस तरह की अफवाह को टीम शीला दीक्षित द्वारा पैदा की गई अफवाह और भाजपा की घबड़ाहट का नतीजा बताते हैं।
राजेश कहते हैं कि 200 यूनिट तक महीने में बिजली इस्तेमाल करने वालों के बिल में सब्सिडी साफ दिखाई देती है। पूरी दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक चल रही है। जलबोर्ड की पुरानी पाइप बदली जा रही है। गली-मोहल्ले की सड़कें करीब-करीब आरसीसी की हो चुकी हैं। राजेश कहते हैं कि मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने जा रहे हैं और स्कूल सुधार का काम अब लोगों को बताने की जरूरत नहीं है। इतना ही दिल्ली में पब्लिक स्कूल मनमानी फीस नहीं वसूल पा रहे हैं।
राजेश सवाल पूछते हुए कहते हैं कि क्या इसे दिल्ली के लोग नहीं समझते? लेकिन राजेश से जब पूछा गया कि दिल्ली के बल पर क्या केजरीवाल देश के प्रधानमंत्री बन जाएंगे तो राजेश ने कहा कि दिल्ली की बस्तियों में केजरीवाल की अहमियत पता है। वहां के लोग जानते हैं कि केजरीवाल ही उनके हितों के लिए लड़ेगा।
2014 में क्या हुआ था?
डा. बिनोद चौबे पूर्वी दिल्ली में नर्सिंग होम चलाते हैं। डा. बिनोद चौबे का कहना है कि आम आदमी का अपना वोट बैंक बन चुका है। यह उन्हें उसका साथ आसानी से छोड़ता नहीं दिखाई देता, लेकिन शीला दीक्षित के काम को दिल्ली के लोग याद करते हैं।
बस, फ्लाईओवर, फुटपाथ सब दिखता है। लेकिन चौबे एक सवाल उठाते हैं? उनका कहना है कि 2014 में क्या हुआ था? भाजपा दिल्ली की सभी सात सीटें जीत गई थी। इसके कुछ ही महीने बाद दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुआ तो भाजपा किसी तरह से तीन सीट जीत पाई, कांग्रेस का खाता नहीं खुला और आम आदमी पार्टी 70 में से 67 सीटें जीत गई।
इसलिए दिल्ली में लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले आम आदमी पार्टी कमजोर रह सकती है। डा. चौबे का कहना है कि देश का प्रधानमंत्री तो भाजपा या कांग्रेस अथवा इन दलों के सहयोग से ही बनेगा और इस सच्चाई को दिल्लीवासी समझते हैं।