इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं जयराम रमेश और मनीष तिवारी ने भी वन संरक्षण विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजे जाने का विरोध किया था। तिवारी ने बिरला को पत्र लिखकर कहा था कि कि इस विधेयक की छानबीन करना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी संसद की स्थायी समिति के अधिकार क्षेत्र में आता है।
लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023 को स्थायी समिति की जगह सेलेक्ट कमेटी को भेजने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि लंबे समय में इस तरह की प्रथाएं स्थायी समिति प्रणाली को बेमानी बना देंगी क्योंकि इसे 1993 में प्रमुख बिलों की जांच के लिए बना गया था।
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उन्होंने कहा कि स्थायी समिति की व्यवस्था के पीछे एक बुनियादी मकसद यही था कि विधेयक की छानबीन के लिए हर बार नयी समिति का गठन ना करना पड़े। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए था।
इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं जयराम रमेश और मनीष तिवारी ने भी वन संरक्षण विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजे जाने का विरोध किया था। तिवारी ने बिरला को पत्र लिखकर कहा था कि कि इस विधेयक की छानबीन करना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी संसद की स्थायी समिति के अधिकार क्षेत्र में आता है। वहीं जयराम रमेश ने बुधवार को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से आग्रह किया था कि वह इस मामले में दखल दें ताकि इसे संबंधित स्थायी समिति को भेजा जाए तथा इस विधेयक को पूरी तरह कमजोर होने से रोका जा सके।