स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, राज्यों को आपात चिकित्सा सेवाएं देने को कहा गया है। लेकिन, लॉकडाउन में कुछ गतिविधियां व्यावहारिक रूप से असंभव हो गई हैं। हालांकि, कोविड-19 के अलावा अन्य आपात चिकित्सा मामलों में मदद के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 104 पर लोग सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं। कुछ विशेष विषयों के लिए अलग से 1075 नंबर पर भी बात कर सकते हैं।
- पीड़ितों ने साझा किए दर्द...कहा-पति के जीवन के लिए ट्रांसप्लांट ही विकल्प
गुरुग्राम निवासी सोनिया घक्कर के पति ल्यूकेमिया से पीड़ित हैं। उनके पति का बोन मैरो ट्रांसप्लांट होना है, जो लॉकडाउन के कारण टलता जा रहा है। सोनिया बताती हैं कि करीब दो महीने पहले इस बीमारी का पता चला। पति के जीवित रहने के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प है। हमने रक्त स्टेम सेल मंगाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से अनुमति मांगी है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
मुंबई निवासी दानिश मर्चेंट (32 साल) की मार्च अंत में बोन मैरो ट्रांसप्लांट होना था। लेकिन, डॉक्टरों ने उपकरण एवं सामान की कमी का हवाला देते हुए इसे टाल दिया। मर्चेंट ने कहा, मैं अब कीमोथेरेपी पर निर्भर हूं। इससे न केवल मेरा बिल बढ़ रहा है बल्कि मैं कमजोर होने के साथ डरा हुआ हूं। प्रार्थना है कि हालात जल्द-से-जल्द काबू में आएं। मेरी बोन मैरो ट्रांसप्लांट सर्जरी में ज्यादा देरी न हो।