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Lockdown in kolkata: ट्रांसप्लांट नहीं होने से ब्लड डिसॉर्डर के मरीजों का जीवन संकट में

Sun, 10 May 2020 03:11 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

  • लॉकडाउन के कारण अस्पतालों में ट्रांसप्लांट सर्जरी ठप, अतिरिक्त कीमोथेरेपी के सहारे मरीज
  • 20 से 30 फीसदी ट्रांसप्लांट ही हो रहे हैं देशभर के अस्पतालों में
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
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विस्तार
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कोविड-19 महामारी के कारण बढ़ी मुश्किलों के बीच ब्लड डिसॉर्डर (रक्त विकार) के मरीजों को इलाज नहीं मिलने से उनका जीवन संकट में है। दरअसल, ब्लड डिसॉर्डर के मरीजों के लिए स्टेम सेल ट्रांसप्लांट ही एकमात्र इलाज है। लेकिन, लॉकडाउन के कारण देश के अनेक अस्पतालों ने ट्रांसप्लांट सर्जरी और अतिरिक्त कीमोथैरेपी जैसी पद्धतियों को अभी रोक रखा है। इस समय बहुत कम 20 फीसदी ही ट्रांसप्लांट हो रहे हैं।

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एक हीमेटोलॉजिस्ट (रुधिर रोग विशेषज्ञ) का कहना है कि लॉकडाउन के कारण ऐसे मरीजों का जीवन खतरे में है।

इसके अलावा, स्टेम सेल डोनर की खोज में महीनों और कई बार तो साल लग जाते हैं। ऐसे में कई बार अत्यंत गंभीर मरीजों के पास इतना समय नहीं होता है। जाने-माने हीमेटोलॉजिस्ट, पद्मश्री और टाटा मेडिकल सेंटर वेल्लोरके निदेशक मेमन चांडी का कहना है कि अस्पतालों में कुछ ही ट्रांसप्लांट सर्जरी हो रहे हैं। लॉकडाउन में प्लेटलेट देने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। ऐसे मरीजों के लिए यह गंभीर समस्या है।

  • ट्रांसप्लांट टलने तक कीमोथेरेपी कराते रहें  

एम्स के कैंसर रोग विभाग के प्रमुख डॉ. ललित कुमार ने कहा, थैलीसीमिया मरीजों के लिए प्रक्रिया कुछ हद तक रोकी जा सकती है, लेकिन अत्यंत गंभीर मरीजों को डॉक्टरों की तुरंत मदद चाहिए। लॉकडाउन से महज 20-30 फीसदी ही ट्रांसप्लांट हो रहे हैं।

ल्यूकेमिया जैसे खून से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के जो मरीज दिल्ली नहीं आ सकते हैं, उन्हें डॉक्टरों से सलाह लेते रहना चाहिए। उन्होंने कहा, हमने अपने मरीजों को सलाह दी है कि अपनी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को देखते हुए कीमोथेरेपी का अतिरिक्त सत्र लें ताकि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक ट्रांसप्लांट प्रक्रिया टाली जा सके।

  • राज्यों को आपात चिकित्सा सेवाएं देने के निर्देश
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स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, राज्यों को आपात चिकित्सा सेवाएं देने को कहा गया है। लेकिन, लॉकडाउन में कुछ गतिविधियां व्यावहारिक रूप से असंभव हो गई हैं। हालांकि, कोविड-19 के अलावा अन्य आपात चिकित्सा मामलों में मदद के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 104 पर लोग सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं। कुछ विशेष विषयों के लिए अलग से 1075 नंबर पर भी बात कर सकते हैं।
  • पीड़ितों ने साझा किए दर्द...कहा-पति के जीवन के लिए ट्रांसप्लांट ही विकल्प
गुरुग्राम निवासी सोनिया घक्कर के पति ल्यूकेमिया से पीड़ित हैं। उनके पति का बोन मैरो ट्रांसप्लांट होना है, जो लॉकडाउन के कारण टलता जा रहा है। सोनिया बताती हैं कि करीब दो महीने पहले इस बीमारी का पता चला। पति के जीवित रहने के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प है। हमने रक्त स्टेम सेल मंगाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से अनुमति मांगी है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
  • बिल बढ़ रहा है, डरा हूं
मुंबई निवासी दानिश मर्चेंट (32 साल) की मार्च अंत में बोन मैरो ट्रांसप्लांट होना था। लेकिन, डॉक्टरों ने उपकरण एवं सामान की कमी का हवाला देते हुए इसे टाल दिया। मर्चेंट ने कहा, मैं अब कीमोथेरेपी पर निर्भर हूं। इससे न केवल मेरा बिल बढ़ रहा है बल्कि मैं कमजोर होने के साथ डरा हुआ हूं। प्रार्थना है कि हालात जल्द-से-जल्द काबू में आएं। मेरी बोन मैरो ट्रांसप्लांट सर्जरी में ज्यादा देरी न हो।
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