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प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर केंद्र-पश्चिम बंगाल में तकरार, एक ट्वीट से छिड़ा वाक युद्ध

Sun, 10 May 2020 12:32 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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स्पेशल ट्रेन (विशेष ट्रेन) - फोटो : PTI
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पश्चिम बंगाल में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रही तनातनी शनिवार की रात खुलकर सामने आ गई। केंद्र ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने ट्रेनें चलाने की मंजूरी नहीं दी है। जबकि ममता बनर्जी की सरकार ने कहा कि शनिवार को आठ ट्रेनों को मंजूरी दी गई है। दरअसल, यह सारी गफलत रेल मंत्रालय के एक ट्वीट से शुरू हुई थी, जिसके बाद दोनों पक्षों को ट्रेनों को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।

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रेल मंत्रालय ने माना कि राज्य सरकार की ओर से आठ ट्रेनों को दी गई मंजूरी उसे प्राप्त हुई है। वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि 6,000 फंसे हुए प्रवासी मजदूर पहले ही वापस आ चुके हैं और राज्य ने ऐसे और श्रमिकों को लाने के लिए अभी तक कुल 10 ट्रेनों को हरी झंडी दी है।

क्या है मामला
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को एक पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल सरकार पर आरोप लगाया कि वह फंसे हुए प्रवासी मजदूरों को ट्रेनों से उनके घर पहुंचाने की इजाजत नहीं दी रही है। हालांकि राज्य सरकार ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि 6,000 प्रवासी पहले ही लौट चुके हैं तथा और अधिक मजदूरों को लेकर 10 ट्रेनें जल्द ही पहुंचेंगी।
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रेल मंत्रालय ने शनिवार सुबह कहा कि आज सुबह तक पश्चिम बंगाल के लिए हमें सिर्फ दो श्रमिक विशेष ट्रेनों की मंजूरी प्राप्त हुई है, एक अजमेर शरीफ से और दूसरा एर्णाकुलम से। इसके बाद मंत्रालय ने रात आठ बजकर 47 मिनट पर ट्वीट में कहा कि गृह मंत्री के अनुरोध के बाद दोपहर में पश्चिम बंगाल ने पंजाब से दो, तमिलनाडु से दो, कर्नाटक से तीन और तेलंगाना से एक ट्रेन को मंजूरी प्रदान की। बंगाल ने महाराष्ट्र से किसी ट्रेन को मंजूरी नहीं दी है।

रेलवे ने बाद में मानी आठ ट्रेनों को मंजूरी मिलने की बात
हालांकि रेलवे ने शनिवार रात के अपने ट्वीट के बाद कहा कि लॉकडाउन के चलते (देश के विभिन्न हिस्सों में) फंसे लोगों को पश्चिम बंगाल पहुंचाने को लेकर आठ विशेष ट्रेनें चलाने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी प्राप्त हो गई है। इस विषय पर राज्य और केंद्र के बीच पूरे दिन चले आरोप-प्रत्यारोप के बाद यह बयान आया।

वहीं पश्चिम बंगाल के गृह सचिव अल्पन बंदोपाध्याय ने कहा कि रेलवे की ट्वीट भ्रामक और गलत है। सभी आठ ट्रेनों को मंजूरी दी गई और संबंधित राज्य सरकारों को शुक्रवार को जानकारी दी गई थी। प्रवासी मजदूरों की वापसी को लेकर चल रही तकरार ने राज्य में कोविड-19 संकट को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक घमासान को और अधिक बढ़ा दिया।

शाह ने लिखा था पत्र
केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिख कर आरोप लगाया था कि राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों को लेकर आने वाली ट्रेनों को राज्य में प्रवेश की इजाजत नहीं दे रही है। उन्होंने इसे प्रवासी श्रमिकों के साथ अन्याय करार दिया था।

हालांकि, राज्य सरकार ने इस आरोप को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि 6000 फंसे हुए प्रवासी मजदूर पहले ही वापस आ चुके हैं और राज्य ने ऐसे और श्रमिकों को लाने के लिये 10 ट्रेनों को हरी झंडी दी है।

इससे पहले रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कर्नाटक से तीन, पंजाब और तमिलनाडु से दो-दो और तेलंगाना से एक ट्रेन फंसे हुए लोगों को लेकर अगले कुछ दिन में पश्चिम बंगाल पहुंचेगी। हालांकि, अधिकारी ने यह भी कहा कि शनिवार को बंगाल से एक भी श्रमिक विशेष ट्रेन रवाना नहीं हुई, जबकि राज्य ने इसके उलट दावा किया।

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शाह झूठ फैला रहे: बनर्जी

उधर, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने शाह पर आरोप लगाया कि वह झूठ फैला रहे हैं। उन्होंने शाह को अपने आरोप साबित करने या माफी मांगने को भी कहा। इस पर, भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य सरकार सिर्फ एक खास समुदाय के लोगों को वापस लाने की व्यवस्था कर रही है।

देश के विभिन्न हिस्सों से अलग-अलग गंतव्यों तक प्रवासी मजदूरों को ले जाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही श्रमिक विशेष ट्रेनों का संदर्भ देते हुए, गृह मंत्री ने पत्र में कहा था कि केंद्र ने दो लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने की सुविधा प्रदान की है। लेकिन केंद्र को ट्रेन सेवाएं परिचालित करने के लिए राज्य सरकार से उम्मीद के मुताबिक सहयोग नहीं मिल रहा।
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