आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 में कहा गया है कि लॉकडाउन 4.0 में अगर कोई व्यक्ति बिना किसी वाजिब कारण के सरकारी कार्यों या ड्यूटी में बाधा पहुंचाता है, तो उसे एक साल की सजा हो सकती है।
धारा 55 में यह प्रावधान किया गया है कि कोई अपराध सरकार के किसी विभाग द्वारा किया गया है तो विभागाध्यक्ष को इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा। तब तक विभागाध्यक्ष को दोषी माना जाएगा, जब तक वह ये साबित नहीं कर देता कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था।
उसे यह भी साबित करना होगा कि उसने ऐसे अपराध को रोकने के लिए तय समय पर तत्परता बरती थी।
अधिनियम की धारा 56 के अनुसार, किसी अधिकारी की उसके कर्तव्य पालन में असफलता या उसकी ओर से इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन के प्रति मौन सहमति, जैसा कोई उल्लंघन सामने आता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
ऐसा कोई अधिकारी, जिस पर इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन कोई कर्तव्य अधिरोपित किया गया है, और जो अपने पद के कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा या करने से इंकार करेगा या स्वयं को उससे विमुख कर लेगा तो उस स्थिति में भी अधिकारी पर कार्रवाई होगी।
बशर्ते, उसने ऐसा करने से पहले अपने वरिष्ठ अधिकारी की लिखित अनुमति न ली हो या उसके पास ऐसा करने के लिए कोई अन्य विधिपूर्ण कारण न हो तो ऐसी स्थिति में उसे एक वर्ष तक की कैद हो सकती है। इसमें जुर्माना भी शामिल रहेगा।
धारा 58 में लिखा है कि लॉकडाउन 4.0 के दौरान कंपनियों से उक्त अपराध होता है, तो उसके लिए संचालक और इंचार्ज को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। साथ ही, वह कंपनी भी ऐसे उल्लंघन की दोषी समझी जाएगी। उसके विरुद्ध भी कार्रवाई करने और दंड दिए जाने का प्रावधान है।
किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनाया जाएगा, यदि वह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक तत्परता बरती थी।
इस अधिनियम में कोई अपराध किसी कंपनी की तरफ से किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की स्वीकृति या मौन सहमति से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, तो वहां ऐसे निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी को उस अपराध का दोषी माना जाएगा और उसे दंड मिलेगा।