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Loan Moratorium Extension: लोन मोरेटोरियम पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार, यहां पढ़ें अदालत में क्या बहस हुई

Tue, 06 Oct 2020 01:04 PM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : For Reference Only
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सर्वोच्च न्यायालय ने लोन मोरेटोरियम की अवधि के दौरान स्थगित ईएमआई में ब्याज पर ब्याज में छूट को लेकर सोमवार को हुई सुनवाई में अपनी असंतुष्टि जाहिर की। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार के हलफनामे पर उसे फटकार लगाई। कोर्ट ने केंद्र से कहा ब्याज माफ करेंगे, कहना काफी नहीं है। सरकार को पूरी रूपरेखा बताना चाहिए कि ब्याज माफी कैसे और कब करेगी। 

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जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने याचिकाओं पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस मामले में विस्तृत चर्चा के बाद दो करोड़ तक के एमएसएमई ऋण, शैक्षिक, आवास, उपभोक्ता, ऑटो, क्रेडिट कार्ड बकाया, पेशेवर और उपभोक्ता ऋण पर लागू ब्याज पर ब्याज नहीं लेने का फैसला किया है। 



कोर्ट ने कहा कि ब्याज पर जो राहत देने की बात की गई है, उसके लिए केंद्रीय बैंक द्वारा किसी तरह का दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया। अदालत ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को एक हफ्ते की मोहलत दी है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र 12 अक्तूबर तक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करें। मामले में अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को होगी। 
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क्रेडाई का सरकार पर सवाल
सुनवाई के दौरान रियल इस्टेट की संस्था क्रेडाई ने कहा कि सरकार ने हलफनामे में आंकड़े दिए हैं, वो बिना किसी आधार के दिए हैं। पहले बैंकों पर 2 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ने की बात कही। अब 6 लाख करोड़ रुपये कह रहे हैं। सरकार ने यह आकलन किस आधार पर किया गया। क्रेडाई के वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार के हलफनामे पर कहा कि यह तथ्यहीन व आधारहीन है।

केंद्र सरकार के मुताबिक सभी लोग मोरेटोरियम का फायदा उठाना चाहते हैं। जबकि यह सुविधा सिर्फ 30 फीसदी कर्जदारों ने मांगी है। 70 फीसदी ने तो सुविधा ली ही नहीं। हलफनामे में लोग-रीस्ट्रक्चरिंग का विकल्प नहीं दिया है। एक सितंबर तक किसी को कोई राहत नहीं मिली है। 

तब कोर्ट ने कहा कि सरकार और केंद्रीय बैंक को इस पर आदेश पास करने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मामला यह नहीं है कि कामथ कमिटी की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखी जाए, बल्कि मामला इसे लागू करने का है।

क्रेडाई के अनुसार सरकार ने रियल एस्टेट क्षेत्र को कोई राहत नहीं दी है और किसी तरह की लोन पुनर्गठन सुविधा भी नहीं दी है। कंपनियों पूरे ब्याज का भुगतान कर रही हैं। हालांकि सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के मुताबिक विभिन्न क्षेत्रों को राहत दी गई है।

आईबीए के वकील ने क्या कहा
वहीं इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि इस मामले में देरी हो रही है, जिसका नुकसान बैंकों को हो रहा है। आईबीए ने कहा कि सुनवाई ज्यादा से ज्यादा दो से तीन दिनों के लिए जवाब देने के लिए टाली जाए। 

आरबीआई ने रखी अपनी बात
आरबीआई की ओर से वकील वी गिरी ने कहा कि लोगों को लग रहा है कि ब्याज पर ब्याज उन्हें बुरी तरह से प्रभावित करेगा। इसलिए इस संदर्भ में और सिफारिशें आनी चाहिए और विचार-विमर्श होना चाहिए। वहीं बैंकों का कहना है कि सरकार के पास दो तरफा अप्रोच है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या बहस हुई हुआ

  • जस्टिस भूषण ने कहा: आपने हमें वह जानकारी दी ही नहीं जो आपसे मांगी गई थी। आपने हमें हलफनामे में जो प्लान बताया है, उसके बारे में यह जानकारी नहीं दी गई कि बैंक उसे लागू कैसे करेंगे। आप कामत समिति की रिपोर्ट को रिकॉर्ड कर नहीं लाए हैं।
  • वरिष्ठ वकील वी गिरी: आरबीआई की ओर से मैं कोर्ट के समक्ष दलील देना चाहूंगा। 
  • जस्टिस भूषण: हम आपको नहीं सुनेंगे। मिस्टर मेहता कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार और आरबीआई की ओर से पेश होते रहे हैं। अब आप कह रहे हैं कि आप दलीलें देंगे। 
  • जस्टिस शाह: हलफनामे में ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह कहता हो कि कामत समिति की रिपोर्ट के संबंध में क्या किया गया है। 
  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता: हमारे पास छिपाने को कुछ नहीं है। हम इसे रिकॉर्ड पर रखेंगे। 
  • वी गिरी: अगर कोर्ट को लगता है कि कामत समिति की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर रखा जाना चाहिए तो हम इसे कोर्ट के समक्ष रखेंगे।  
  • जस्टिस भूषण: बात रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर रखने की ही नहीं, बल्कि लागू करने की भी है। ये ऐसे सुझाव नहीं हैं, जिन्हें लागू किया जा सकता था। आरबीआई और केंद्र को कुछ आदेश जारी करने होंगे जिससे लोगों को पता चल सके कि उन्हें कैसे फायदा मिलेगा। 
  • वी गिरी: हम यह करेंगे। 
  • जस्टिस शाह: कब? यह कैसे किया जाएगा? ऐसा लंबे समय से चल रहा है। आपको इसे एक पुनर्गठन योजना में बदलना चाहिए। 
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