6 गतिविधियां जो बाकी जीवों के लिए बनी मौत
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की भारत में अधिकारी सेजल वोरा ने बताया कि मानव की 6 गतिविधियों से वन्य जीवों को बड़ा नुकसान हो रहा है। इनमें शिकार, खेती, जंगलों की कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और किसी नाजुक पर्यावरण में खतरनाक जीवों की प्रजातियों को बसाना शामिल है।
- समुद्र में प्लास्टिक 1980 के मुकाबले 10 गुना बढ़ा है, इससे 86 प्रतिशत समुद्री कछुओं सहित कई जीवों पर संकट है
- 95% व्हाइट टिप शार्क खत्म हो चुकी हैं, रे व अन्य शार्क की आबादी 71 प्रतिशत घटी है।
- 90% वेटलैंड पूरी तरह खत्म हो चुके हैं, हर 2 सेकंड में फुटबॉल के एक मैदान बराबर जंगल काटा जा रहा है।
बच सकते हैं अगर भी इतना करें
- नुकसान कर रही 6 प्रमुख गतिविधियों पर नियंत्रण करने पर ध्यान देना होगा...पृथ्वी का तापमान 1.5 डिग्री से ज्यादा नहीं बढ़ने देना होगा।
- प्रकृति को नुकसान आज ही रोक दें तो वन्य जीवों की आबादी 2050 तक पहले के स्तर पर ला सकेंगे।
- स्थानीय फल, सब्जी, अनाज व अन्य खाद्य पदार्थों का उपयोग करके व भोजन बेकार न करके वन्यजीवों को नुकसान 46 प्रतिशत कम कर सकते हैं।
सफल होगा ‘प्रोजेक्ट चीता’
अमर उजाला ने भारत में प्रोजेक्ट चीता और इसी प्रकार के अन्य प्रोजेक्ट्स की सफलता व वन्य जीवों के संरक्षण पर रवि सिंह से प्रश्न किया...
- सिंह ने कहा कि प्रोजेक्ट चीता सफल होगा। पहले भी ऐसे ही प्रोजेक्ट्स से घड़ियाल, मगर, असम के एक सींग वाले गैंडे, बाघ, गंगा की डॉल्फिन और गुजरात में एशियाई शेरों को बचाने में भारत ने सफलता हासिल की है। प्रोजेक्ट चीता में यह अनुभव अहम भूमिका निभाएंगे।
भारत में पक्षी, पशु, कीट...सभी पर संकट
- 1.2 डिग्री सेल्सियस गर्म हो चुकी है पृथ्वी पहले की अपेक्षा
- 40% मधुमक्खियां पिछले 25 साल में खत्म हो चुकी
- 847 पक्षियों की प्रजातियां अध्ययन में शामिल, इनमें 50% की आबादी गिरी
- 146 प्रजातियों के पक्षी तो भारत से निकट भविष्य में पूरी तरह खत्म हो जाएंगे
- 45 से 64% जंगल 2030 तक जलवायु परिवर्तन, बारिश, सूखे से नुकसान सह रहे होंगे
- 137 वर्ग किमी के सुंदरबन का इलाका 1985 के मुकाबले खत्म हो चुका है। इसका बड़ा हिस्सा भारत में
- ताजे पानी के कछुओं की 17 प्रजातियां खत्म ही समझिए... 150 प्रजातियों के उभयचर भी खतरे में