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किसानों से मीटिंग के बाद झुकी महाराष्ट्र सरकार, आंदोलन खत्म होने के आसार

Mon, 12 Mar 2018 09:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस - फोटो : ANI
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त्रिपुरा में हार के बाद महाराष्ट्र के किसानों को एकजुट कर माकपा ने भाजपा सरकार को मुंबई में लाल सलामी दी। मुंबई के आजाद मैदान में जमा हुए किसानों के जिद्दी रुख को भांपते हुए सोमवार को फडणवीस सरकार के हाथ पांव फूल गए। सरकार ने अगले छह महीनों में सभी मांगें माने जाने का लिखित आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर किसान माने और उन्होंने अपना आंदोलन वापस लिया। इसके बाद नासिक से पैदल आए किसानों को छत्रपति शिवजी महाराज टर्मिनस से विशेष ट्रेन के जरिये रवाना किया गया।

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उल्लेखनीय है कि माकपा से जुड़े संगठन ऑल इंडिया किसान सभा के नेतृत्व में 35 हजार किसानों का जत्था सोमवार को मुंबई के आजाद मैदान में जमा हुआ था। किसानों ने संपूर्ण कर्जमाफी और आदिवासियों को वन जमीन का अधिकार देने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांगों को लेकर सोमवार को विधान भवन का घेराव करने का ऐलान किया था।

महानगर में भारी संख्या में किसानों के पहुंचते ही सरकार की चिंता बढ़ गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ विधानसभा में किसान प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बैठक के बाद सरकार ने मांगे मानने का लिखित भरोसा दिया। बैठक खत्म होने के बाद नासिक के प्रभारी मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि किसानों की करीब 12-13 मांगे थीं, जिनमें से कई को मान लिया गया है। जो मांगें मानी गई हैं उसका लिखित ड्रॉफ्ट तैयार किया गया है। 
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बैठक के बाद फडणवीस सरकार के तीन मंत्री चंद्रकांत पाटिल, गिरीश महाजन और शिवसेना कोटे के मंत्री एकनाथ शिंदे आजाद मैदान पहुंचे। चंद्रकांत पाटिल ने किसानों के बीच कहा कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली है। जल्द ही इन मांगों पर अमल किया जाएगा। अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मंगलवार को किसानों की मांगों के संदर्भ में विधानसभा को जानकारी देंगे।

गिरीश महाजन ने कहा कि 25 साल के राजनीतिक जीवन में कभी इतना बड़ा लाल बादल नहीं देखा। बता दें कि अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक ढवले ने चेतावनी दी थी कि जब तक मांगे नहीं मानी जातीं तब तक किसान आजाद मैदान से नहीं उठेंगे। हालांकि सरकार के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा कि फिलहाल, हम सरकार के आश्वासन से संतुष्ट हैं। यदि मांगे पूरी नहीं हुई तो फिर आंदोलन शुरू करेंगे।

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आदिवासियों को वन जमीन अधिकार देने का फैसला जल्द

Farmer Protest
01 से 30 जून 2017 तक कर्जमाफी
सरकार के आश्वासन के मुताबिक, साल 2009 की बजाए वर्ष 2001 से लेकर 30 जून 2017 तक, सभी किसानों का कर्ज माफ होगा। कर्जमाफी की शर्तों को आसान बनाया जाएगा। पति-पत्नी दोनों के नाम पर कर्ज है तो डेढ़ लाख तक का कर्ज माफ होगा। हालांकि सरकार का दावा है कि 80 फीसदी किसानों का कर्जमाफ हुआ है, जिससे 47 हजार किसानों को लाभ मिला है। 

आदिवासियों को वन जमीन अधिकार देने का फैसला जल्द
छह महीने में आदिवासियों को वन जमीन का अधिकार देने पर फैसला ले लिया जाएगा। वन अधिकार से जुड़े सभी मामले, प्रलंबित दावे, अपील आदि का छह महीने में निपटारा कर दिया जाएगा। दमणगंगा-पिंजाल-गोदावरी नदी जोड़ो परियोजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। 

नहीं होगा आदिवासियों का विस्थापन
किसी भी परियोजना में आदिवासियों को विस्थापित नहीं होने दिया जाएगा। वर्ष 2006 के पहले की जितनी जमीन होगी उसे आदिवासियों को पट्टा किया जाएगा। पुराने राशन कार्ड को बदला जाएगा। आदिवासियों के राशन कार्ड तीन महीने में बदले जाएंगे। दूध की दर तय करने के लिए जल्द फैसला होगा। संजय गांधी निराधार योजना का मानधन भी बढ़ेगा। 
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