राज्यपालों व उप राज्यपालों के वार्षिक सम्मेलन के कार्यक्रम को इस बार पांच मुद्दों पर चर्चा के लिए बांटा गया है। इनमें आदिवासी मुद्दा, कृषि सुधार, जल जीवन अभियान, नई शिक्षा नीति और ‘ईज ऑफ लिविंग’ प्रशासन का मुद्दा शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी सम्मेलन को इस तरह के प्रयोग पर खुशी जाहिर की।
सांविधानिक ढांचे में राज्यपाल और उप राज्यपाल की अहम भूमिका : राष्ट्रपति
देश के सांविधानिक ढांचे में राज्यपालों और उप राज्यपालों की अहम भूमिका है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि यह भूमिका खासतौर पर तब और अहम हो जाती है, जब देश की प्रगति के लिए सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद पर जोर दिया जा रहा है।
राष्ट्रपति यहां राज्यपालों और उपराज्यपालों के दो दिवसीय 50वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद सभी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, सभी राज्यपालों को सार्वजनिक जीवन का भरपूर अनुभव है और देश की जनता को इसका अधिकतम लाभ मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा, राज्यपाल की भूमिका महज संविधान की रक्षा और उसके संरक्षण तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह लोगों के कल्याण और उनकी सेवा में लगातार बने रहने की प्रतिबद्धता भी है। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, आखिरकार हम सभी जनता के लिए काम करते हैं और उन्हीं के प्रति जवाबदेह हैं।
उन्होंने आदिवासियों के कल्याण के लिए सशक्त संदर्भ देते हुए कहा कि उनका विकास और सशक्तिकरण समावेशी विकास के साथ-साथ देश की आंतरिक सुरक्षा से भी सीधा जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, राज्यपाल खुद को मिली सांविधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए सरकार को सभी तरह की उचित सलाह दे सकते हैं।
यह उन लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए आवश्यक है, जो विकास के पैमाने पर अपेक्षाकृत पीछे छूट गए हैं। उन्होंने जल शक्ति अभियान को भी स्वच्छ भारत अभियान की तरह जन आंदोलन बनाने के लिए जुटने की अपील की। साथ ही कहा कि जल संसाधनों का संरक्षण और चतुराई भरा उपयोग देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।
उन्होंने नई शिक्षा नीति का लक्ष्य देश को ‘नॉलेज सुपर पावर’ बनाना बताया और सभी राज्यपालों से विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के तौर पर शोध व नवाचारों को बढ़ावा देने का आग्रह किया।