राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे शराब की दुकाने हटाने को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले कोर्ट ने कहा कि लोगों की सेहस सबसे पहले है। शीर्ष अदालत के आदेशानुसार पहली अप्रैल से राजमार्गों के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानें हटाई जानी हैं। अदालत में शाराब कारोबारियों की लगातार याचिकाएं पहुंच रही हैं।
इससे पहले मामले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि 'बैलेंस अप्रोच' की दरकार है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में सभी हितधारकों को विकल्प सुझाने के लिए कहा था।
The Supreme Court today reserved it's order banning liquor in 500 metre distance from state and national highways.
— ANI (@ANI_news) March 30, 2017
Liquor ban within 500 mtrs of National&State Highways matter- SC says our order regarding public health is clear, excise act doesn't matter pic.twitter.com/1IuI49Nh87
— ANI (@ANI_news) March 30, 2017
सोमवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि यह गंभीर विषय है। उन्होंने कहा था कि हमें यह देखने की जरूरत है कि सड़क दुर्घटनाओं में कितनी मौतें होती हैं। आजीविका चलाने वाले की मौत होने पर परिवार पर बुरा असर पड़ता है। लिहाजा इस मामले में बैलेंस अप्रोच की जरूरत है।
पहाड़ों पर किस तरह लागू होगा फैसला?
सांकेतिक चित्र
सोमवार को पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से कई बड़े-बड़े वकीलों ने अपने पक्ष रखे थे। अधिकतर का कहना था कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के 500 मीटर के दायरे में लगभग हर शहर की सड़कें आ जाती हैं। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालती आदेश में फेरबदल की गुहार करते हुए कहा था कि हिमाचल प्रदेश में तो 500 मीटर पर या तो पहाड़ है या खाई। ऐसे में इस आदेश का पालन कैसे होगा?
कुछ ऐसी ही स्थिति उत्तर पूर्व के राज्यों में है। वहीं वरिष्ठ वकील सीए सुंदरम ने कहा था कि 15 दिसंबर के आदेश में यह स्पष्ट नहीं है कि राजमार्गों के 500 मीटर के दायरे में होटल और पब हैं या नहीं। उन्होंने दिल्ली के एयरोसिटी स्थित होटलों का जिक्र करते हुए कहा कि ये सभी राजमार्ग के 500 मीटर के दायरे में आते हैं।
संकेतक या बोर्ड लगाने पर भी प्रतिबंध
बता दें कि पिछली साल 15 दिसंबर के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के 500 मीटर के दायरे में एक अप्रैल, 2017 से शराब की दुकानें नहीं होंगी। साथ ही अदालत ने इस दायरे में शराब की दुकानों के लिए नए लाइसेंस जारी करने पर भी रोक लगा दी थी। कोर्ट ने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर शराब के दुकानों की मौजूदगी के संकेतक या बोर्ड लगाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के वर्ष 2015 के आंकड़े के मुताबिक, देश में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में करीब डेढ़ लाख लोगों की मौत होती है जबकि इससे तिगुनी संख्या में लोग घायल होते हैं। अधिकतर दुर्घटनाओं की वजह शराब पीकर वाहन चलाने की बताई गई है।