इसी तरह की पीआईएल पहले दाखिल कर चुके एडवोकेट मैथ्यू नेदमपूरा ने कोर्ट से इसे सार्वजनिक करने से ज्यादा अदालत के अपने रिकॅार्ड के लिए बेहद जरुरी बताया। एक सुझाव ये भी दिया गया कि अदालत परिसर में लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा मुहैया कराई जाये ताकि स्टूडेंट, वकील और वादी अदालत की कार्यवाही देख सकें।
जबकि एक और वकील ने सोशल मीडिया पर इसके गलत इस्तेमाल होने का डर बताया। इसका विरोध करने के पीछे सोशल मीडिया के मालिकों का देश के बाहर होना भी बताया गया जिस वजह से उन पर कार्रवाई करना भी मुश्किल होगा।
आपको बता दें, इससे पहले बॅाम्बे हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था और एपेक्स कोर्ट ने भी लाइव स्ट्रीमिंग की मांग को ठुकराया था। लेकिन 9 जुलाई ,2018 को केन्द्र सरकार और अदालत दोनों ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाया। अभी इस मामले में 3 अगस्त ,2018 को भी सुनवाई होगी जिसमें अटॅार्नी जनरल सरकार की ओर से इसे लागू करने के लिए सुझाव लिखित में देंगे। अगर लाईव स्ट्रीमिंग की इजाजत सुप्रीम कोर्ट देता है तो ये अपने आप में एेतिहासिक फैसला होगा।