चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह आपराधिक मामलों में दोषी नेताओं के चुनाव लड़ने पर आजीवन पाबंदी के पक्ष में नहीं है। इसके साथ ही आयोग ने कहा कि वह राजनेताओं के अापराधिक मामलों पर लगाम लगाने के लिए अन्य विक्लपों पर भी विचार कर रहा है।
Lifetime ban on convicted and chargesheeted MPs and MLAs case: EC tells SC it did not want a permanent ban on convicted MPs and MLAs
— ANI (@ANI_news) July 12, 2017
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए कहा कि आप इस मामले में साफ-साफ अपना पक्ष क्यों नहीं रखते। कोर्ट ने पूछा की आप दोषियों के चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं या विरोध में? जिसके जवाब में आयोग ने कहा कि वह दोषियो के आजीवन पाबंदी के पक्ष में नहीं है। मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत दोषियों पर लगाम लगाई जा जा रही है।
मौजूदा प्रावधान के मुताबिक, अगर नेता को दोषी ठहराया जाता है और उसे दो या उससे अधिक वर्ष की सजा होती है तो उस पर सजा पूरी करने के छह वर्ष बाद तक चुनाव लडऩे पर पाबंदी है।
इससे पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि वह निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने कहा था कि वह इसका समर्थन करती है कि आपराधिक मामलों में दो या उससे अधिक वर्ष की सजा पाने वालों पर चुनाव लड़ने की आजीवन पाबंदी होनी चाहिए। उनका कहना था कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए इस तरह की पाबंदी होनी चाहिए। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना यह पक्ष रखा था।