की महिलाएं दिल्ली और यूपी की महिलाओं से कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं। यहां वे बिना किसी की परवाह किये स्टाइलिश कपड़े पहनकर सड़कों पर टहलती हैं। यहां के पुरुष भी महिलाओं की आजादी को काफी अहम मानते हैं। इस पूर्वोत्तर राज्य की महिलाएं अक्सर पढ़ाई और उद्यमिता के मामले में पुरुषों को पीछे छोड़ देती हैं, लेकिन यहां की राजनीति में महिलाओं के लिए शायद ही कोई जगह हो।
राज्य की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की बात करें, तो राज्य सरकार में सिर्फ एक ही महिला मंत्री है। उनका मानना है कि यहां के पुरुष महिलाओं को राजनीति में स्वीकार नहीं करना चाहते। आपको बता दें मिजोरम में अभी तक सिर्फ चार महिलाएं विधायक बन पाई हैं।
वनलालमपुई राज्य की चौथी महिला विधायक हैं। यहां पहली महिला विधायक 1978 के चुनाव में चुनी गईं थीं, जिनका नाम थनमवई था। एक और महिला नेता लल्हलीमपुई हमर 1987 में राज्य की पहली महिला मंत्री बनी थीं। इन्होंने मिजो नेशनल फ्रंट के टिकट पर चुनाव जीता था।
इसके 27 साल बाद 2014 में वनलालमपुई ने राज्य में चुनाव दर चुनाव महिलाओं की हार का सिलसिला तोड़ा। मुख्यमंत्री
ललथनहवला ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया और वह राज्य के इतिहास में दूसरी महिला मंत्री बन गईं।
यहां की राजनीति की संरचना करने वाली भी महिलाएं ही हैं राज्य की महिला वोटरों की संख्या पुरुष वोटरों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है। 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य में महिलाओं की संख्या अब भी पुरुषों से कम है।
यहां प्रति 1000 पुरुषों की संख्या के मुकाबले 976 महिलाएं हैं। हालांकि, 2013, 2014 और 2018 की मतदाता सूची में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा रही है। ताजा मतदाता सूची के मुताबिक प्रति 1,000 पुरुषों के मुताबिक राज्य में 1,051 महिला वोटर्स हैं।
मिजोरम में 28 नवंबर को
विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन क्या इस बार पार्टियां महिला उम्मीदवारों को टिकट देंगी? शायद नहीं। मिजो नेशनल फ्रंट ने आखिरी बार 2003 में महिला उम्मीदवार को टिकट दिया था। कांग्रेस ने 2013 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक महिला को टिकट दिया था।