‘उम्मीद से कम’ प्रदर्शन करने वाले शिक्षण संस्थानों या विश्वविद्यालयों को बंद या फिर उनका दूसरे संस्थान के साथ विलय किया जा सकता है। ऐसा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) समर्थित परामर्श कार्यक्रम के बावजूद संस्थान या विश्वविद्यालय के प्रदर्शन में सुधार नहीं होने पर होगा।
सूत्रों ने बताया कि इस संबंध में यूजीसी पूर्ण रूप से तैयार है और प्रणाली के पुनर्गठन के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक प्रारूप तैयार किया है जो कहीं अधिक स्वायत्त और न्यूनतम नियमन को प्रोत्साहित करने वाला है। उन्होंने कहा, ‘माना जा रहा है कि सभी शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों का ऑडिट किया जाएगा और मापदंड के मुताबिक प्रदर्शन के आधार पर उन्हें तीन व्यापक वर्गों में वर्गीकृत किया जाएगा।’ इन वर्गों में ‘उत्कृष्ट संस्थान’, ‘सुधार की गुंजाइश रखने वाले संस्थान’ और ‘उम्मीद से कम प्रदर्शन करने वाले संस्थान’ शामिल किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पहले वर्ग में शामिल संस्थानों को अधिक स्वायत्तता और अनुदान दिया जाएगा। दूसरे वर्ग के संस्थानों की कमियां तलाशकर अधिकारी सही उपाय का सुझाव देंगे।
सूत्रों ने कहा, ‘तीसरे वर्ग में चिह्नित विश्वविद्यालय और संस्थान यूजीसी से निर्देशित और मार्गदर्शित होंगे। हालांकि, ऐसा करने में उनके (शैक्षणिक संस्थान) नाकाम रहने पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय उन्हें बंद करने या अन्य संस्थानों के साथ विलय पर विचार कर सकता है।’ वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले महीने अपने बजट भाषण में यूजीसी पुनर्गठन और कई अन्य शिक्षण संस्थानों में सुधार की घोषणा की थी।