एचआईवी-एड्स मरीजों को संपत्ति का अधिकार होगा और 18 वर्ष से कम उम्र के मरीजों को अपने घर में रहने का समान अधिकार होगा। नौकरी पाने और शैक्षणिक संस्थानों में मरीज को अपनी बीमारी के बारे में बताना अनिवार्य नहीं होगा और यदि मरीज जानकारी देता भी है तो उसके नाम को सार्वजनिक करने पर सजा और जुर्माना के प्रावधान है।
कानून के प्रावधानों के मुताबिक राज्यों में कानून का उल्लंघन ने हो इसके लिए हर राज्य में एक-एक लोकपाल नियुक्त किए जाएंगे। इसके अलावा उन सभी संस्थानों में जहां 100 या इससे अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं, वहां ऐसे मरीजों की शिकायत सुनने के लिए एक शिकायत अधिकारी नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है।
एचआईवी-एड्स की रोकथाम के क्षेत्र में काम कर रही संस्था नाको के आंकड़ों के मुताबिक एचआईवी-एड्स के मरीजों की संख्या में पिछले कुछ सालों के दौरान कमी आई है। बावजूद इसके नाको के साल 2011 के आकड़ों के मुताबिक देश में करीब 21 लाख लोग एचआईवी और एड्स से पीड़ित हैं।