लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को अगली सरकार के लिए 100 दिवसीय एजेंडा तैयार करने का निर्देश दिया था। इस कड़ी में एक दिन पहले केंद्रीय सचिव ने सभी सचिवों को पत्र भी लिखा था। जिसके बाद से विधि मंत्रालय ने कुछ विधयेकों में सनसेट क्लॉज शामिल करने की वकालत की है।
कानून की किताबों में न हो अव्यवस्था- विधि मंत्रालय
बता दें कि विधि मंत्रालय ने कुछ प्रकार के विधेयकों में सनसेट क्लॉज या स्वत: निरस्तीकरण प्रावधान को शामिल करने की वकालत की है, ताकि कानून की किताबों में अव्यवस्था न हो और इसे अपने 100 दिवसीय एजेंडे में शामिल किया जा सके। मंत्रालय के विधायी विभाग ने नए विधायी प्रस्ताव में सनसेट क्लॉज को अपने 100 दिवसीय एजेंडे का हिस्सा बनाते हुए कहा है कि संबंधित मंत्रालयों के परामर्श से इस संबंध में कदम उठाए जाएंगे।
क्या होता है सनसेट क्लॉज?
सनसेट क्लॉज मुख्य रूप से अस्थायी प्रकृति के कानूनों या गतिशील स्थितियों से निपटने वाले कानूनों पर लागू होता है। एक बार जब उनकी उपयोगिता समाप्त हो जाती है, तो वे कानून की किताबों से हटा दिए जाते हैं।
'कानून की अवधि को सीमित के लिए होता है क्लॉज'
इस मामले में पूर्व केंद्रीय विधि सचिव पीके मल्होत्रा ने बताया कि जब भी विधानमंडल - संसद या राज्य विधानमंडल - अपने द्वारा पारित किसी कानून की अवधि को सीमित करना चाहता है, तो वह नीतिगत तौर पर एक सनसेट क्लॉज प्रदान कर सकता है, जिसमें यह प्रावधान हो कि एक निश्चित अवधि - आवश्यकता के आधार पर पांच या 10 वर्ष - बीत जाने के बाद कानून समाप्त हो जाएगा। पूर्व केंद्रीय विधि सचिव ने बताया कि विधानमंडल सनसेट क्लॉज के कारण निष्क्रिय हो चुके कानून को नया जीवन देने के लिए एक नया कानून पारित कर सकता है।
विधायी विभाग के अनुसार, वह संबंधित प्रशासनिक मंत्रालयों और विभागों के परामर्श से नए विधायी प्रस्ताव में सनसेट क्लॉज या स्वत: निरस्तीकरण क्लॉज को शामिल करना चाहता है। विभाग ने कहा कि जब भी इस संबंध में प्रस्ताव प्राप्त होंगे, आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह लंबे समय से लंबित मांग है। यह प्रथा कुछ अन्य देशों में भी प्रचलित है। मुझे लगता है कि ऐसे कई कानून हैं, जिनमें इस तरह का प्रावधान रखा जा सकता है, ताकि संसद या राज्य विधानमंडल भी सतर्क रहें कि समय बीतने के साथ अगर किसी कानून को जारी रखने की जरूरत है, तो वे उसे नए सिरे से देखेंगे।
कई आयोगों ने इस तरह के प्रावधान पर दिया जोर
पूर्व केंद्रीय विधि सचिव ने बताया, कि और अगर वे इसे जारी नहीं रखना चाहते हैं, तो कानून में दिए गए दिन से यह अपने आप खत्म हो जाएगा। हाल के दिनों में कानूनी सुधारों पर विचार करने के लिए गठित कुछ आयोगों ने भी इस तरह के प्रावधान पर जोर दिया है।