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Kiren Rijiju : रिजिजू बोले- हम इंदिरा गांधी के समय जैसा कुछ नहीं कर रहे, सरकार ने कोर्ट को पूरा सम्मान दिया

Wed, 19 Oct 2022 04:49 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, अहमदाबाद।

सार

कानून मंत्री ने कहा कि न्यायपालिका उपनिवेश व्यवस्था पर आधारित है। उनके कपड़े भी यही दिखाते हैं, जबकि कपड़े भारत के मौसम के अनुसार होने चाहिए, वे इसे लेकर चीफ जस्टिस से बात करना चाहेंगे। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में अंग्रेजी और वकीलों के वर्चस्व पर उन्होंने कहा कि 40-50 वकील जजों को भी धमकाते हैं।
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किरेन रिजिजू - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश के कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जमाने में तीन सीनियर जजों को ओवरटेक करके किसी को चीफ जस्टिस बनाया गया, मौजूदा सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया। आज जब सरकार कुछ नियंत्रण के लिए कदम उठाती है तो वही लोग जो कभी न्यायपालिका पर कब्जा चाहते थे, कहते हैं कि मौजूदा सरकार न्यायपालिका पर हावी हो रही है, नियंत्रण कर रही है या जजों की नियुक्ति में रोड़े अटका रही है।

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कानून मंत्री रिजिजू सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पत्रिका पांचजन्य की ओर से आयोजित ‘साबरमती संवाद’ में बोल रहे थे।  रिजिजू ने कहा, केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 8 साल में ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे न्यायपालिका को नुकसान हो या उसके अधिकार को चुनौती मिले। जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग लाई, तो इसे चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द किया। सरकार चाहती तो इस पर और कदम उठा सकती थी। 

1993 से पहले नहीं उठती थी अंगुली
रिजिजू ने कहा, 1993 के पहले जजों पर अंगुली नहीं उठती थी क्योंकि दूसरे जजों की नियुक्ति में उनकी भूमिका नहीं होती थी। वे इन सबसे दूर रहते थे। 

जनता अब जजों को भी देख रही 
कानून मंत्री ने कहा, सांसद पांच साल के लिए चुनकर आते हैं, लोग चाहें तो 5 साल बाद उन्हें फिर से कुर्सी पर न भी बैठाएं। जजों को लोग नहीं चुनते, फिर भी याद रखना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट व कई हाईकोर्ट की कार्यवाही का सीधा प्रसारण हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी चीजें आ रही हैं, लोग जजों का व्यवहार देख रहे हैं।
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यूपी का भी जिक्र

  • जजों को व्यावहारिकता, वित्तीय स्थितियां नहीं पता.. केंद्रीय मंत्री ने कहा, यूपी में कोविड के दौरान एक जज के आदेशों का उल्लेख कर कहा कि सभी जिला अस्पतालों में निश्चित दिनों में कोविड की दवाएं, ऑक्सीजन, एंबुलेंस आदि देने को कहा गया। लेकिन हमारे पास यह सब होना भी तो चाहिए, हमारी अपनी क्षमता है। जजों को व्यवहारिक दिक्कतें व वित्तीय स्थिति पता नहीं होती।
  • केवल निर्णय में जज अपनी बात कहें.. कानून मंत्री ने कहा कि न्यायपालिका को जब अपने दायरे में रखने की व्यवस्था नहीं होती, तो ‘न्यायिक सक्रियता’ जैसे शब्द इस्तेमाल होते हैं। कई बार जज भी कोई बात कह देते हैं, जो निर्णय का हिस्सा नहीं होती है, लेकिन यह बातें कहकर वे अपनी सोच उजागर करते हैं। 

जजों को धमकाते हैं 40-50 वकील
कानून मंत्री ने कहा कि न्यायपालिका उपनिवेश व्यवस्था पर आधारित है। उनके कपड़े भी यही दिखाते हैं, जबकि कपड़े भारत के मौसम के अनुसार होने चाहिए, वे इसे लेकर चीफ जस्टिस से बात करना चाहेंगे। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में अंग्रेजी और वकीलों के वर्चस्व पर उन्होंने कहा कि 40-50 वकील जजों को भी धमकाते हैं। वे अंग्रेजी के कई शब्द इस्तेमाल करना जानते हैं। इसी वजह से उन्हें लगता है कि अदालतों में भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल बढ़ना चाहिए। इसकी शुरुआत हाईकोर्ट से कर सकते हैं।

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