लोकसभा में गोरक्षा के नाम पर भीड़ हिंसा को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान सपा के पूर्व मुखिया मुलायम सिंह यादव के एक सवाल ने सभी सांसदों को एक क्षण अत्याचारियों की श्रेणी में खड़ा कर दिया। हालांकि, सवाल समझने के बाद एक सांसद ने जब हाथ उठाया तो सदन ठहाकों से गूंज उठा। दरअसल, मुलायम ने भीड़ हिंसा पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अत्याचार और उत्पीड़न की शुरुआत परिवार से होती है। इसमें सबसे पहले पत्नियां ही शिकार होती हैं।
उन्होंने सांसदों से कहा, ‘हाथ उठाकर बताइये कि आपमें से कौन अपनी पत्नी पर अत्याचार नहीं करता, पत्नियों को दबा कर नहीं रखता? मुलायम के इस सवाल से सदन में शांति छा गई। जब एक भी सांसद ने हाथ नहीं उठाया तो मुलायम ने कहा कि जब सदन में यह स्थिति है तो देश में क्या हाल होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
मुलायम के यह कहने पर अचानक एक सदस्य ने अपना हाथ उठाया। इस पर मुलायम ने फिर मुस्कुरा कर कहा कि बहुत अच्छी बात है कि आप अपनी पत्नी को दबा कर नहीं रखते। इस पर पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा। मुलायम ने फिर कहा कि समाज में समरसता कायम रखने के लिए इसकी शुरुआत परिवार से करनी होगी। सांसदों को भी पत्नियों पर अत्याचार बंद करने की शपथ लेनी चाहिए।
अपने पूरे भाषण में मुलायम ने गोरक्षा के नाम पर हो रही हत्या पर कुछ खास नहीं कहा। अपना अलग रुख अपनाते हुए समाज में धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर होने वाले भेदभाव और हिंसा की निंदा की। इसी दौरान उन्होंने कहा कि हिंसा के मामले में जहां तक पुरुष और महिला का मामला है तो इसमें महिलाएं ज्यादा अत्याचार की शिकार होती हैं।