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दुष्कर्म के मामले में 15 साल पहले हुई थी आखिरी फांसी, अब तक बेटियों को 'इंसाफ' का इंतजार

Fri, 06 Dec 2019 06:30 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हैदराबाद की पशु चिकित्सक के दोषियों के एनकाउंटर को लेकर पूरे देश में बहस शुरू हो गई है। कोई इसके पक्ष में है, तो कोई विपक्ष में। इन सब के बीच मगर एक बात तय है कि देश में बेटियों को इंसाफ पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। दुष्कर्मियों को फांसी चढ़ाने का कानून तो है, लेकिन दोषियों को फांसी पर लटकाने की राह इतनी भी आसान नहीं है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुष्कर्म के मामले में देश में आखिरी फांसी करीब 15 साल पहले हुई थी। 

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कोलकाता में हुई थी आखिरी फांसी 

  • दुष्कर्म के मामले में आखिरी फांसी वर्ष 2004 में हुई थी
  • धनंजय चटर्जी ने 14 साल की बच्ची हेतल पारीख से दरिंदगी कर उसकी हत्या कर दी थी 
  • 14 अगस्त 2004 को कोलकाता के अलीपोर सेंट्रल जेल में उसे फांसी दी गई थी
  • इत्तेफाक से उसी दिन उसका जन्मदिन भी था। 1991 के बाद पश्चिम बंगाल में यह पहली फांसी थी 

फांसी की सजा, लेकिन फिर भी जिंदा

  • वर्ष 2017 में अलग-अलग मामलों में 109 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई
  • इनमें से 43 मामले यानी 39 फीसदी मामले दुष्कर्म से जुड़े हैं
  • वर्ष 2016 में दुष्कर्म के मामलों में 24 लोगों को अदालत से फांसी की सजा सुनाई गई थी 

सात साल से इंसाफ के इंतजार में निर्भया 

  • निर्भया के साथ दरिंदगी दिसंबर 2012 में हुई थी
  • मगर सात साल बीत जाने के बाद भी दोषियों को अभी तक सजा नहीं मिली है 
  • पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी
  • मगर दोषी ने दया याचिका लगा दी, हालांकि दिल्ली सरकार और गृह मंत्रालय ने इसे खारिज कर दिया
  • मगर अभी भी उसे फांसी नहीं हो सकी है 

15 साल में सिर्फ चार फांसी 

  • वर्ष 2017 तक 371 दोषी ऐसे थे, जिन्हें फांसी की सजा पर अमल होना बाकी है 
  • 31 दिसंबर, 2018 तक देश में 426 दोषियों को फांसी की सजा पर अमल का इंतजार था
  • फांसी का सबसे पुराना मामला 1991 का है 
  • 15 साल में सिर्फ चार लोगों को फांसी को दी गई। दुष्कर्म में सिर्फ एक फांसी दी गई
  • बाकी तीन फांसी आतंकवाद से जुड़े मामले में दी गई थी 
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इन चार लोगों को मिली फांसी 

  • धनंजय चटर्जी, 2004 : नाबालिग से दुष्कर्म व हत्या, कोलकाता में फांसी दी गई  
  • मोहम्मद अजमल कसाब, 2012 : मुंबई हमले में शामिल आतंकी को पुणे के येरवदा जेल में फांसी दी गई 
  • मोहम्मद अफजल गुरु, 2013 : संसद हमले के दोषी को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई
  • याकूब मेमन, 2015 : 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट में नागपुर जेल में फांसी पर लटकाया गया
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