हैदराबाद की पशु चिकित्सक के दोषियों के एनकाउंटर को लेकर पूरे देश में बहस शुरू हो गई है। कोई इसके पक्ष में है, तो कोई विपक्ष में। इन सब के बीच मगर एक बात तय है कि देश में बेटियों को इंसाफ पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। दुष्कर्मियों को फांसी चढ़ाने का कानून तो है, लेकिन दोषियों को फांसी पर लटकाने की राह इतनी भी आसान नहीं है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुष्कर्म के मामले में देश में आखिरी फांसी करीब 15 साल पहले हुई थी।
कोलकाता में हुई थी आखिरी फांसी
- दुष्कर्म के मामले में आखिरी फांसी वर्ष 2004 में हुई थी
- धनंजय चटर्जी ने 14 साल की बच्ची हेतल पारीख से दरिंदगी कर उसकी हत्या कर दी थी
- 14 अगस्त 2004 को कोलकाता के अलीपोर सेंट्रल जेल में उसे फांसी दी गई थी
- इत्तेफाक से उसी दिन उसका जन्मदिन भी था। 1991 के बाद पश्चिम बंगाल में यह पहली फांसी थी