हैदराबाद कांड के आरोपी ढेर
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किसी भी अपराधी के खिलाफ घातक हथियारों जैसे बंदूक-बम का प्रयोग करने से पहले पुलिस या सुरक्षाबलों के द्वारा चेतावनी देना जरूरी होता है। इस दौरान पुलिस अपराधी या आरोपी को डराने के लिए हवाई फायर का प्रयोग भी कर सकती है। इसके बाद भी अगर वह नहीं रुकता है तब पुलिस उसके ऊपर फायर कर सकती है। शुरूआत में पुलिस को कमर के नीचे गोली चलाना जरूरी होता है। लेकिन, अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर निकल जाए तो कमर के ऊपर भी गोली मारी जा सकती है।
एनकाउंटर की जांच जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में पुलिस एनकाउंटरों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया था। पुलिस मुठभेड़ के सभी मामलों की जांच सीबीआई या सीआईडी जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।जांच खत्म होने तक इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को प्रमोशन या वीरता पुरस्कार नहीं मिलता।
अदालत के निर्देशों के मुताबिक पुलिस मुठभेड़ के सभी मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) दखल नहीं देगा, जब तक इस बात की पूरी आशंका हो कि एनकाउंटर फर्जी था।