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Aditya-L1: वैज्ञानिक बोले- प्रति दिन 1440 तस्वीरें भेजेगा सूर्य मिशन का सबसे बड़ा पेलोड VELC, तैयारियां पूरी

Fri, 01 Sep 2023 06:01 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु

सार

Aditya-L1: आदित्य एल-1 का प्राथमिक पेलोड विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) लक्षित कक्षा में पहुंचने पर विश्लेषण के लिए ग्राउंड स्टेशन को प्रतिदिन 1,440 तस्वीरें भेजेगा।
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आदित्य एल1 मिशन (सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आदित्य एल-1 का प्राथमिक पेलोड विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) लक्षित कक्षा में पहुंचने पर विश्लेषण के लिए ग्राउंड स्टेशन को प्रतिदिन 1,440 तस्वीरें भेजेगा। इसके बाद इनका विश्लेषण किया जाएगा। इसरो का यह महत्वकांक्षी मिशन सूर्य का अध्ययन करने के लिए कल यानी शनिवार को लॉन्च किया जाएगा। 

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वीईएलसी आदित्य-एल1 पर सबसे बड़ा और तकनीकी रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण पेलोड है। इसका यहां इसरो के सहयोग से होसकोटे में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए), क्रेस्ट (विज्ञान प्रौद्योगिकी अनुसंधान और शिक्षा केंद्र) परिसर में परीक्षण किया गया। 
 

आदित्य एल1 को पीएसएलवी-सी57 रॉकेट के जरिए दो सितंबर को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर प्रक्षेपित किया जाएगा। यह सूर्य का अध्ययन करने के लिए सात पेलोड ले जाएगा, जिनमें से चार सूर्य से प्रकाश का निरीक्षण करेंगे और शेष तीन प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्रों के यथास्थान मापदंडों को मापेंगे।

आदित्य एल1 को लैग्रेंजियन प्वाइंट 1 (एल1) के चारों ओर प्रभामंडल कक्षा में स्थापित किया जाएगा, जो सूर्य की दिशा में पृथ्वी से एक लाख किलोमीटर दूर है। यह एक ही सापेक्ष स्थिति के साथ सूर्य के चारों ओर घूमेगा। इसलिए यह सूर्य को लगातार देख सकेगा।
 

वीईएलसी की परियोजना वैज्ञानिक और अभियान प्रंबंधक डॉ. मुथु प्रियल ने कहा, सातत्य चैनल एक इमेजिंग चैनल है, जिससे एक मिनट में एक छवि आएगी। इसलिए, हमें एक घंट में लगभग 1,440 तस्वीरें मिलेंगी।
 

उन्होंने कहा, आईआईए वीईएलसी पेलोड ऑपरेशंस सेंटर (पीओसी) की मेजबानी करेगा, जो इसरो के आईएसएसडीसी (इंडियन स्पेस साइंस डेटा सेंटर) से कच्चा डेटा प्राप्त करेगा। इसे वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए उपयुक्त बनाने के लिए आगे की प्रक्रिया करेंगे और इसे प्रसार के लिए आईएसएसडीसी को वापस भेजेंगे।   

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उन्होंने कहा, आईआईए द्वारा एक अनूठा सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है, जो स्वचालित रूप से कोरनल मास इजेक्शन की की घटना और इसके होने के समय का पता लगाता है। यह  चौबीस घंटों के भीतर वैज्ञानिक समुदाय को बताता है कि क्या यह पृथ्वी से टकराएगा या नहीं। आईआईए के अधिकारियों के अनुसार, 190 किलोग्राम वीईएलसी पेलोड पांच साल तक तस्वीरें भेजेगा, जो उपग्रह का नाममात्र जीवन है। हालांकि, यह ईंधन की खपत आदि के आधार पर लंबे समय तक रह सकता है।
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