IMD महानिदेशक मत्युजंय महापात्र
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अप्रैल महीने की शुरूआत में ही गर्मी से लोग परेशान हैं। देश का एक बड़ा हिस्सा भीषण गर्मी से तप रहा है। इस बीच सवाल यह है कि आखिर बारिश कब लोगों को राहत देगी? भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक मत्युजंय महापात्र ने मानसून को लेकर राहत देने वाली जानकारी दी है। मौसम विभाग का कहना है कि इस साल जून के बाद अल नीनो की स्थिति कम होती दिख रही है, जो कि मानसून के लिए अच्छा संकेत है।
अनुकूल स्थितियां पैदा कर रहा है अल नीनो
विभाग द्वारा अल नीनो की स्थितियों को देखने के बाद अंदाजा लगाया गया है कि बड़े पैमाने पर जलवायु संबंधी घटनाएं दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए अनुकूल स्थितियां पैदा कर रही हैं। महापात्र ने कहा कि इस साल जून की शुरुआत तक अल नीनो का प्रभाव कम होता दिख रहा है। इस वजह से मध्य प्रशांत महासागर ज्यादा गर्म नहीं होगा और दक्षिण-पश्चिम मानसून पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। खास बात यह है कि दक्षिण पश्चिम मानसून की वजह से भारत में लगभग 70 प्रतिशत बारिश होती है। यह बारिश कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर यह वर्षा पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अच्छा संकेत है। बता दें कि भारत में 2023 के मानसून के मौसम में औसत से कम वर्षा हुई, जिसके लिए अल नीनो के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। चलिए पहले आपको समझाते हैं कि आखिर अल नीनो क्या है।
क्या है अल नीनो?
अल नीनो सदर्न ऑसिलेशन (ईएनएसओ) का एक हिस्सा है, जो मौसम और समुद्र से संबंधित एक प्राकृतिक जलवायु घटना को बताता है। ईएनएसओ के दो चरण होते हैं- अल नीनो और ला नीना। अल नीनो का अर्थ स्पेनिश भाषा में 'छोटा लड़का' है और यह एक गर्म चरण है। वहीं, ला नीना का मतलब 'छोटी लड़की' होता है जो ठंड का चरण है। प्रशांत महासागर में पेरू के निकट समुद्री तट के गर्म होने की घटना अल-नीनो कहलाती है। आसान भाषा में समझे तो समुद्र का तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में जो बदलाव आते हैं उस समुद्री घटना को अल नीनो का नाम दिया गया है। इस बदलाव के कारण समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री ज्यादा हो जाता है।
कब दस्तक देगा मानसून
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार जुलाई से सितंबर के मानसून सीजन के लिए ला नीना की अनुकूल स्थिति देखी जा सकती है। आसान शब्दों में कहें तो इस साल मानसून सीजन में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है, जिसे यह अच्छा संकेत कहा जा सकता है। ला नीना का भारतीय मानसून पर सकारात्मक असर देखा जाता है। इस महीने के अंत में मौसम विभाग द्वारा फिर एक बार दक्षिण-पश्चिम मानसून का पूर्वानुमान जारी किया जाएगा, जिससे स्थितियां और भी ज्यादा स्पष्ट हो जाएंगी।