राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे की जमीनों के मालिकाना हक को लेकर छिड़ा गतिरोध दूर न होने पर भूस्वामी संघ में आक्रोश है। इसे लेकर कोलासिब जिले के दो हजार से ज्यादा जमीन मालिकों ने बुधवार से एनएच-306 को अनिश्चित काल के लिए बंद करने का फैसला किया है। इसके बाद मिजोरम का देश के बाकी हिस्सों से संपर्क टूट जाएगा।
भूस्वामी संघ के एक नेता ने कहा कि वह सरकार से राजमार्ग के किनारे की भूमि के स्वामित्व के मुद्दों को हल करने और फ्रीजिंग आदेश को हटाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा 1965 की रोड साइड रिजर्व फॉरेस्ट अधिसूचना को भी रद्द करने का मुद्दा उठा रहे हैं। लेकिन सरकार इसमें कोई निर्णायक कदम नहीं उठा सकी है।
कोलासिब डिस्ट्रिक्ट लैंड ओनर्स एसोसिएशन की संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) के अध्यक्ष जेम्स वनलालरिंगा ने कहा कि केंद्र ने कुछ साल पहले NH-6 के साथ-साथ NH-306 को फोरलेन करने की मंजूरी दी थी। इसका काम राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) को सौंपा गया था। लेकिन मिजोरम वन विभाग और राजस्व विभाग के बीच विवाद के चलते काम शुरू नहीं हो सका।
वनलालरिंगा ने आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण के बाद जब मुआवजा जारी करने की प्रक्रिया चल रही थी, तो राज्य वन विभाग ने 1965 की अधिसूचना के आधार पर राजमार्ग के दोनों ओर 800 मीटर भूमि को सड़क के किनारे आरक्षित वन घोषित कर दिया। लगभग ढाई हजार लोगों की मिजोरम-असम सीमा पर वैरेंगटे शहर और कोलासिब जिले के मुआलखांग के बीच एनएच-306 और एनएच-6 के किनारे जमीन है।
उन्होंने कहा कि NH-306 और NH-6 आपस में जुड़े हैं और पूर्वोत्तर राज्य को असम के जरिये से देश के बाकी हिस्सों से जोड़ते हैं। सरकार तीन साल बाद भी उनकी समस्या को दूर नहीं कर सकी है। इस मामले पर राज्य के वन मंत्री ललथनसांगा और कोलासिब के उपायुक्त के साथ चर्चा की थी लेकिन बैठकें बेनतीजा रहीं। उन्होंने कहा कि अब हमने सेथॉन में NH-306 को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का फैसला लिया है। सरकार पर दबाव बनाने के लिए हमारे पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। हालांकि बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं वाले वाहनों को छूट दी जाएगी।
वहीं मिजोरम के वन मंत्री ललथनसांगा ने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। एसोसिएशन के नेताओं के साथ बैठक की और उन्हें सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई है। ललथनसांगा ने उनसे आंदोलन बंद करने और मामले पर अदालत के निर्देश का इंतजार करने का आग्रह किया। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने गौहाटी उच्च न्यायालय को 1965 की अधिसूचना की अपील पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। वहीं अदालत ने विवाद को सुलझाने के लिए मिजोरम के मुख्य सचिव को वन विभाग और राजस्व विभाग के सचिवों के साथ बैठक करने का भी सुझाव दिया।