न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम ने यह निर्देश मेसर्स होटल सरवण भवन की उस याचिका को खारिज करते हुए दिया, जिसमें अधिकारियों को 1,575 करोड़ रुपये के निवेश से शॉपिंग मॉल और हाइपर मार्केट के निर्माण के लिए यहां कोयम्बेडू में केंद्रीय बस स्टैंड के सामने स्थित 3.45 एकड़ जमीन के लिए पट्टा देने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
मद्रास उच्च न्यायालय ने सरकारी जमीनों पर कब्जा करने पर सोमवार को चिंता जताई और कहा कि इसके खिलाफ कानून बनाना समय की मांग है। अदालत ने तमिलनाडु सरकार को सरकारी भूमि पर कब्जा करने के मामले में संरचनात्मक भ्रष्टाचार की जांच करने, अपराधों से निपटने के लिए उपयुक्त कानून बनाने का भी निर्देश दिया, ताकि इस तरह के अवैध कृत्यों को रोका जा सके।
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न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम ने यह निर्देश मेसर्स होटल सरवण भवन की उस याचिका को खारिज करते हुए दिया, जिसमें अधिकारियों को 1,575 करोड़ रुपये के निवेश से शॉपिंग मॉल और हाइपर मार्केट के निर्माण के लिए यहां कोयम्बेडू में केंद्रीय बस स्टैंड के सामने स्थित 3.45 एकड़ जमीन के लिए पट्टा देने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्ववर्ती अन्नाद्रमुक सरकार ने उसे जो जमीन दी थी, उसे मौजूदा द्रमुक सरकार ने पिछले साल रद्द कर दिया।
न्यायाधीश ने कहा कि स्थापित तथ्य और मामले के संबंधित पक्षों द्वारा पेश किए गए दस्तावेज इस अपरिहार्य निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त होंगे कि याचिकाकर्ता पट्टा देने का हकदार नहीं है। न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता सरकारी भूमि का अतिक्रमणकारी था, जिसने इसे व्यवस्थित तरीके से अन्यायपूर्ण लाभ के लिए हड़प लिया। विशेष रूप से ऐसा कुछ निजी व्यक्तियों के समर्थन में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया ये सभी समाज में प्रभावशाली लोग थे।
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न्यायाधीश ने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार जमीन हड़पने वालों को दंडित करने के लिए एक विशेष कानून लाने पर विचार करे। जमीन हड़पने से संबंधित मामले बढ़ते जा रहे थे और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से इसे जिस तरीके से किया गया था, वह एक गंभीर मुद्दा है। निस्संदेह इस तरह के अपराधों में कार्यपालिका और राजनीतिक लोगों के विभिन्न वर्गों के बीच मिलीभगत थी।