उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि सोशल मीडिया और समाचार पत्रों आदि में लगातार न्यायालय की छवि धूमिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वह भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों की सुनवाई कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें मामले की सुनवाई कर रही संवैधानिक पीठ से हटाए जाने के लिए अभियान चल रहा है।
जस्टिस मिश्रा शीर्ष अदालत में पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ की अध्यक्षता कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के पोस्ट और लेखों का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक विशेष न्यायाधीश के खिलाफ नहीं बल्कि संस्था को बदनाम करने की कोशिश है। कुछ पक्षों जिसमें किसान संघ उन्हें इस मामले की सुनवाई से हटाना चाहती है। उनका कहना है कि वह उसी आदेश की वैधता की सुनवाई कर रहे हैं जिसे उनके द्वारा भी लिखा गया था।
पिछले साल छह मार्च को उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि एक बड़ी पीठ भूमि अधिग्रहण को लेकर दिए गए दो अलग-अलग मामलों की वैधता की जांच करेगी। जस्टिस मिश्रा ने कहा, 'यदि संस्थान की अखंडता दांव पर लगती है तो मैं पहला व्यक्ति होउंगा जो बलिदान करूंगा। मैं पक्षपाती नहीं हूं और न ही मैं किसी बाहरी चीज से प्रभावित हूं। यदि मुझे लगेगा कि मैं पक्षपाती हूं तो ही मैं खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग करुंगा।'