सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में गवाही देने वाले एक चश्मदीद गवाह को धमकाए जाने के आरोप के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को मामले की जांच करने की अनुमति दी। मामले में गवाह ने आरोप लगाया था कि उसे पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा के खिलाफ गवाही देने के कारण धमकाया गया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यूपी पुलिस को निर्देश दिया कि वह इस मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच करें। साथ ही अपनी रिपोर्ट में पहले से निकाले गए निष्कर्षों से प्रभावित हुए बिना मामले की समीक्षा करें। अदालत ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो पुलिस एक नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।
इस आधार पर मिली अजय मिश्रा को मिली अनुमति
यूपी पुलिस का दावा
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 16 अप्रैल के बाद तक स्थगित कर दी, क्योंकि मामला ट्रायल कोर्ट में जाने वाला था। पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने गवाहों को धमकाए जाने को गंभीर मामला बताया और मिश्रा की जमानत रद्द करने की मांग की। गौरतलब है कि यह मामला 3 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी में हुए हिंसा से जुड़ा है, जब किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी।
एक नजर लखीमपुर खीरी हिंसा पर
गौरतलब है कि 3 अक्तूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में किसानों का विरोध प्रदर्शन हुआ था। यह विरोध उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के क्षेत्र दौरे के खिलाफ था। इस हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। चार किसानों को एक स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहन (SUV) ने कुचल दिया था। इसके बाद गुस्साए किसानों ने एक ड्राइवर और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी।
इस मामले में दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर आरोपों के तहत उपमुख्यमंत्री के बेटे आशीष मिश्रा और 12 अन्य लोगों पर आरोप लगाया है। इस फैसले के बाद अब इस मामले की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।