अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा से आ रहे हैं ये मैसेज
विदेश में बैठकर सिख फॉर जस्टिस के जरिए 'खालिस्तान' आंदोलन शुरू करने वाला गुरपतवंत सिंह पन्नू कहता है, लखीमपुर खीरी में जो किसान मारे गए हैं, उनके परिजन योगी सरकार से कोई मदद न लें। राज्य सरकार ने इस घटना के बाद घोषणा की थी कि वह मारे गए किसानों के परिजनों को 45-45 लाख रुपये देगी। पन्नू ने अपने मैसेज में कहा, पीड़ित परिवार यह राशि न लें। उन्हें सिख फॉर जस्टिस की तरफ से दोगुनी राशि प्रदान की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों ने इस मैसेज को गंभीरता से लिया है। ऐसे मैसेज अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा से आ रहे हैं। इस साल गणतंत्र दिवस पर लाल किला में मचे उपद्रव के दौरान जो किसान चोटिल हुए थे और आंदोलन के विभिन्न चरणों में जिन किसानों की जान गई थी, पन्नू ने उनका नाम, पता और घटना का विवरण मांगा था। पन्नू ने कहा था कि वह इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाएगा।
वह दुनिया को बताएगा कि भारत में किसानों को प्रताड़ित किया जा रहा है। सरकार, जानबूझकर किसान विरोधी कृषि कानूनों को वापस नहीं ले रही है। किसानों को खेत खलियान छोड़कर सड़क पर बैठने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पन्नू को आतंकियों की सूची में शामिल कर रखा है। एनआईए ने पंजाब में पन्नू की संपत्तियां जब्त की हैं। पन्नू अब भारत का नागरिक नहीं है, इसके चलते जांच एजेंसियां उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाती। एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, मौजूदा समय में पन्नू, भारत का नागरिक नहीं है। इसी वजह से जांच एजेंसियां उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पातीं। पन्नू जहां से फोन कॉल करता है, वहां इस तरह की आजादी है। वहां पर ऐसी बातें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आती हैं। अगर वहां की पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करती है तो वह मानवाधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में आ जाएगा। एनआईए के एक अधिकारी के मुताबिक, गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारत लाना बहुत मुश्किल है। वहां के कानून इस तरह की छूट नहीं देते। आतंकी गुरपतवंत सिंह के पास विदेशी नागरिकता है। उसके खिलाफ कार्रवाई में यही सबसे बड़ी बाधा बन गई है। एनआईए जांच के अलावा पंजाब और हरियाणा में पन्नू के खिलाफ कई केस दर्ज हैं।