नोटबंदी के 36 दिन बाद भी जमीन पर कैश की किल्लत को देख संघ के संगठनों का धैर्य भी जवाब देने लगा है। स्वदेशी जागरण मंच और भारतीय मजदूर संघ के बाद लघु उद्योग भारती ने भी नोटबंदी से हो रही कठिनाइयों पर चिंता जताते हुए सरकार को भविष्य में पैदा होने वाले खतरों को लेकर आगाह किया है। वैसे सरकार की ओर से वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल बुधवार को लघु उद्योग भारती के पदाधिकारियों संग बैठक कर उनकी चिंताओं का निराकरण करने का प्रयास करेंगे।
लघु उद्योग भारती का कहना है कि नोटबंदी के बाद कैश की कमी से जो हालात पैदा हुए हैं उससे लघु उद्योग, ग्रामीण उद्योग और कृषि को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कैश की कमी से मजदूरों के रोजगार भी छीनने लगे हैं। कैशलेस अर्थव्यवस्था रातों रात संभव नहीं है। जल्द से जल्द नकदी का प्रवाह तेज होना चाहिए।
अमर उजाला से बातचीत में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश मित्तल ने कहा कि आतंकवाद, काला धन, हवाला और नकली नोटों पर लगाम कसने के लिए नोटबंदी सही तो है, मगर इसके बाद कैश की किल्लत से जो हालात पैदा हुए हैं, उससे लघु, मझोले, ग्रामीण और कृषि उद्योग को संकट का सामना करना पड़ रहा है। निचले स्तर पर नकदी की सप्लाई जल्द सामान्य न हुई तो हालात बिगड़ने लगेंगे।