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LAC Row: भारत-चीन के बीच कोर-कमांडर स्तर की बैठक, 20वें दौर की बातचीत के दौरान इन मुद्दों पर हुई बात

Wed, 11 Oct 2023 09:22 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

20वें दौर की सैन्य वार्ता में कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका। बातचीत सौहार्दपूर्ण रही, लेकिन लंबित मुद्दों के समाधान पर कोई प्रगति नहीं हुई। समझा जाता है कि वार्ता में भारत ने देपसांग और डेमचोक में लंबित मुद्दों के समाधान पर जोर दिया।
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भारत-चीन सीमा विवाद - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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भारत-चीन के बीच नौ और 10 अक्तूबर को कोर-कमांडर स्तर की बैठक हुई। यह बैठक का 20वां दौर था। बैठक भारतीय पक्ष में चुशुल-मोल्डो सीमा के पास हुई। दोनों देशों ने जल्द से जल्द और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य स्पष्ट, खुले और रचनात्मक तरीके से बातचीत की और विचारों को साझा किया। 

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दोनों देशों के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के मुताबिक बैठक में पश्चिमी क्षेत्र में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के साथ शेष मुद्दों के समाधान पर अहम चर्चा हुई। इस दौरान 13-14 अगस्त 2023 को आयोजित कोर कमांडरों की बैठक के दौरान उठाए गए मुद्दों और समाधान की भी समीक्षा की गई। इससे पहले 23 अप्रैल को हुई सैन्य वार्ता के 18वें दौर में भारतीय पक्ष ने डेपसांग और डेमचोक में लंबित मुद्दों को हल करने के लिए  दबाव डाला था।

जानकारी के मुताबिक, भारत और चीन प्रासंगिक सैन्य और राजनयिक तंत्र के माध्यम से बातचीत और विचारों के आदान-प्रदान की गति को बनाए रखने पर सहमत हुए। उन्होंने अंतरिम रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर शांति बनाए रखने की भी प्रतिबद्धता जताई।
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नहीं निकल सका ठोस परिणाम
सूत्रों के मुताबिक, 20वें दौर की सैन्य वार्ता में कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका। बातचीत सौहार्दपूर्ण रही, लेकिन लंबित मुद्दों के समाधान पर कोई प्रगति नहीं हुई। समझा जाता है कि वार्ता में भारत ने देपसांग और डेमचोक में लंबित मुद्दों के समाधान पर जोर दिया। भारतीय पक्ष का नेतृत्व लेह मुख्यालय 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रशिम बाली ने किया, जबकि चीनी टीम का नेतृत्व दक्षिण शिनजियांग सैन्य जिले के कमांडर ने किया। 

पिछले तीन साल से दोनों देशों के बीच गतिरोध
इससे पहले हुई सैन्य वार्ताओं में भारतीय पक्ष ने देपसांग और डेमचोक में लंबित मुद्दों को हल करने के लिए जोर दिया था। पूर्वी लद्दाख में पिछले तीन साल से दोनों देशों के बीच गतिरोध बना हुआ है। दोनों ही देशों ने इस इलाकों में बड़े पैमाने पर अपने सैनिकों को तैनात किया हुआ है।

चीन की आक्रामकता के बाद बिगड़े थे हालात
2020 में कोरोना के दौरान चीन की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति को बदलने के लिए भारी हथियारों और बड़ी संख्या में सैनिकों को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश के बाद पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच मामलों को सुलझाने के लिए कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता शुरू हुई थी। 

पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद बढ़ा तनाव
पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध पांच मई, 2020 को पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद पैदा हुआ था। जून 2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में काफी गिरावट आई थी, जो दशकों में दोनों पक्षों के बीच सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष था। सिलसिलेवार सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों ने 2021 में पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण किनारों और गोगरा क्षेत्र में पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी की।

सैन्य-राजनयिक चैनलों के माध्यम से बातचीत पर सहमत
हालांकि, कई दौर की वार्ता के बाद दोनों देश पीछे हटने को तैयार हो गए थे। दोंनो ही देशों की सेनाएं पीछे हट गई थीं। कई इलाकों को लेकर अब भी वार्ता जारी है। आज हुई वार्ता में भी दोनों देश संपर्क में रहने और सैन्य-राजनयिक चैनलों के माध्यम से बातचीत बनाए रखने और जल्द से जल्द शेष मुद्दों के स्वीकार्य समाधान पर काम करने पर सहमत हुए।

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