मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान से वैश्विक बाजार भी सचेत हो चुका है। बाजार ने ला नीना के संभावना को देखते हुए तैयारी कर दी है। अनाज का व्यापार करने वाले कारोबारियों का कहना है कि गेहूं और मकई की कीमतों पर मंदी का दबाव है। जबकि 2024-25 सीजन के लिए पर्याप्त सप्लाई अनुमान लगातार वैल्यू में गिरावट का सुझाव दे रहे हैं।
इन दिनों देश के कई क्षेत्रों में मानसून की तेज बारिश का असर देखने को मिल रहा है। वहीं अब साल के अंत में ला नीना के आने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। ऐसे में देश के कई हिस्सों में गेहूं और मकई की फसलें प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल दोनों अनाजों की कीमतें चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं, लेकिन पिछले साल ला नीना के असर से अमेरिका में फसलों की कटाई काफी कम हुई है। मौजूदा अनुमानों से संकेत मिलता है कि ला नीना से कृषि उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
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कृषि वैज्ञानिक एसके रवि का कहना है कि 2022-23 में आए ला नीना के कारण अमेरिकी मक्का (9.1 फीसदी) और गेहूं (9.5 फीसदी) प्रोडक्शन में जबरदस्त गिरावट आई, जो ला नीना के असर को साफ दर्शाता है। मौसम विभाग ने इस कहा है कि 70 फीसदी संभावना है कि अक्तूबर-दिसंबर 2024 के दौरान ला नीना डेवलप होगा। जबकि 50 फीसदी संभावना है कि इसके मॉडरेट होने से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकती है।
मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान से वैश्विक बाजार भी सचेत हो चुका है। बाजार ने ला नीना के संभावना को देखते हुए तैयारी कर दी है। अनाज का व्यापार करने वाले कारोबारियों का कहना है कि गेहूं और मकई की कीमतों पर मंदी का दबाव है। जबकि 2024-25 सीजन के लिए पर्याप्त सप्लाई अनुमान लगातार वैल्यू में गिरावट का सुझाव दे रहे हैं। ला नीना मार्केट अनाज के व्यापार की स्थिति को बदल सकता है। मौसम बदलने से प्रमुख फसलों का उत्पादन कम हो जाएगा और इस वजह से कीमतों में उछाल आ सकता है।
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तेजी से बढ़ सकती हैं मक्का और गेहूं की कीमतें
इस बीच यूएस डिपार्टमेंट ऑफ अमेरिका ने 2024-25 के दौरान गेहूं और मकई के लिए पर्याप्त सप्लाई का अनुमान लगाया है। इसमें अमेरिकी मकई के प्रोडक्शन में 15.1 बिलियन बुशल की बढ़ोतरी है, जो मंदी के मार्केट का संकेत है। वहीं, बीएमआई ने भी इस वर्ष के लिए गेहूं और मकई दोनों की कीमतों के लिए मंदी का पूर्वानुमान है, जिसमें गेहूं का औसत 6.05/बुशल डॉलर और मकई का 4.30/बुशल डॉलर रहने का पूर्वानुमान है।