इसके बाद दूसरे नेताओं को बुलाया गया और बैठक शुरू हुई। बैठक में गुट 23 के नेताओं गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, भूपेंद्र सिंह हुड्डा,शशि थरूर, मनीष तिवारी आदि के बोलने से पहले ही अजय माकन ने माइक संभाला और कहा कि पार्टी को मजबूत करने के लिए राहुल गांधी को फिर से अध्यक्ष पद संभालना होगा। माकन ने राहुल को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल गांधी आप पार्टी का नेतृत्व करिये और उसी तरह पार्टी को आगे बढ़ाइए जैसे आपने 2017 और 2018 में आगे बढ़ाते हुए कई राज्यों में पार्टी को जिताया था। इसके बाद भक्तचरण दास ने अजय माकन की बात का समर्थन किया और दस जनपथ के वफादारों ने फौरन हां में हां मिलाते हुए तालियां बजाईं। इसमें गुट-23 के नेताओं ने भी अपना स्वर मिला दिया।
राहुल ने कहा, पार्टी को करना होगा मजबूत
तब राहुल गांधी ने कहा कि मेरे अध्यक्ष बनने का सवाल नहीं है। बड़ा सवाल है कि कांग्रेस को कैसे मजबूत किया जाए, जिससे वह एक बार फिर जनता का समर्थन जुटा सके। हम सबको इस पर विचार करना चाहिए। बाकी पार्टी मुझे जो भी भूमिका सौंपेगी, वह मुझे स्वीकार है। राहुल के इस कथन से साफ हो गया कि अब उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद संभालने से इनकार नहीं है। इसके बाद कांग्रेस को कैसे मजबूत किया जाए इस पर चर्चा शुरू हो गई। सोनिया गांधी ने सबको सुनने के बाद यह आश्वासन दिया कि वह इन सारे मुद्दों पर जल्दी ही जरूरी कदम उठाएंगी।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों खेमों के बीच लगभग नब्बे फीसदी मुद्दों पर सहमति बन गई है और शेष दस फीसदी पर भी रास्ता निकाल लिया जाएगा। तय किया गया है कि जनवरी में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाकर राहुल गांधी को अध्यक्ष बना दिया जाए। इसके बाद संगठन के चुनाव कराते हुए अप्रैल में पार्टी अधिवेशन में इस पर मुहर लगा दी जाए। साथ ही कांग्रेस कार्यसमिति के सभी सदस्यों का मनोनयन करने की बजाय मुख्य कार्यसमिति के सदस्यों का चुनाव कराया जाए और स्थायी आमंत्रित और विशेष आमंत्रित सदस्यों को पहले की तरह अध्यक्ष मनोनीत करें।
अहम भूमिका में नजर आईं प्रियंका
दस जनपथ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में प्रियंका गांधी सबसे ज्यादा अहम भूमिका में नजर आईं। उन्होंने कमोबेश वही काम किया, जो अब तक अहमद पटेल किया करते थे। प्रियंका ने एक तरह से पार्टी में राजनीतिक प्रबंधन में अहमद पटेल की जगह ले ली है। अपने सूचना तंत्र के जरिये प्रियंका ने राहुल गांधी को लेकर गुट-23 के नेताओं का मन टटोल लिया था। इसके बाद उन्होंने सोनिया गांधी को इन नेताओं से मिलने के लिए तैयार किया। फिर कमलनाथ को उन्होंने ही सोनिया से इन नेताओं से बातचीत करने और उन्हें बैठक में लाने के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी दिलवाई।
सोनिया और प्रियंका ने यह रणनीति बनाई कि पहले सभी नेताओं के बीच राहुल के लिए सहमति बनवाई जाए और अगर उसमें कठिनाई आए, तो विकल्प के तौर पर प्रियंका के नाम को आगे बढ़ाया जाए। राहुल को भी इसके लिए तैयार कर लिया गया था। इसके बाद बेहद सियासी सावधानी बरतते हुए बैठक के लिए गुट-23 के प्रमुख नेताओं के साथ साथ ए के एंटनी, अंबिका सोनी, अशोक गहलौत, अजय माकन, विवेक बंसल, भक्तचरण दास, हरीश रावत जैसे दस जनपथ के वफादार नेताओं को भी बुलाया गया। लेकिन आश्चर्यजनक यह रहा कि राहुल गांधी के बेहद विश्वासपात्र माने जाने वाले महासचिव के.सी.वेणुगोपाल और मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला को बैठक में नहीं बुलाया गया।सूत्रों का कहना है कि क्योंकि इन दोनों नेताओं की कार्यशैली को लेकर गुट 23 के नेताओं को सबसे ज्यादा एतराज रहा है। इसलिए इन्हें बैठक में नहीं बुलाया गया जिससे असंतुष्ट खेमा अपनी बात खुलकर कह सके।