अंतत मार्च 2018 में भारत सरकार के वकील ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि कूनो में जल्द शेर भेजे जा रहे हैं। इस आधार पर अवमानना याचिका समाप्त कर दी गई। इसके अलावा मध्यप्रदेश सरकार ने गुजरात से चिड़ियाघर के लिए युवा शेर मांगे गए थे। सरकार की मंशा थी कि भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में उनका प्रजनन करवाएंगे और वंश बढ़ने पर जंगल में छोड़ेंगे। इस पर गुजरात सरकार ने पहले सहमति जताई, लेकिन बाद में योजना का पता चलते ही चिड़ियाघर को भी शेर देने से इंकार कर दिया। इसके बाद जब शेर भेजने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती बढ़ी तो गुजरात सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की गाइड लाइन को हवाला बना लिया। एमपी सरकार ने तय मापदंड पूरे किए लेकिन भी शेर नहीं आ पाए।
राजघराने ने मांगी अपनी जमीन
इधर, चीतों के नए घर श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में जमीन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, अभ्यारण्य के लिए दी गई जमीन को लेकर पालपुर राजघराने के वंशजों ने कोर्ट में याचिका लगाई है, जिसकी 19 सितंबर को सुनवाई होगी। राजघराने के वंशजों की ओर से दी गई याचिका में कहा गया है कि यह जमीन शेरों को रखने के लिए दी गई थी। लेकिन अब इस सेंचुरी में चीते लाए जा रहे हैं। पालपुर राजघराने का कहना है कि या तो हमें अपनी जमीन वापस दी जाए या अभयारण्य में शेर लाए जाएं।
पालपुर राजघराने का दावा है कि उन्होंने अपना किला और जमीन शेरों के लिए दी थी, न कि चीतों के लिए। शेर आते तो जंगल बचता लेकिन अब चीतों के लिए मैदान बनाए जा रहे हैं और पेड़ काटे जा रहे हैं। राज परिवार की तरफ से कहा गया है कि जब कूनो को गिर शेरों को लाने के लिए अभयारण्य घोषित किया गया, तो उन्हें अपना किला और 260 बीघा भूमि खाली करनी पड़ी। पालपुर राजघराने के वंशजों ने अपनी पुश्तैनी संपत्ति वापस पाने के लिए राज्य सरकार के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
कांग्रेस का हमला, कूनो में गिर के शेर आने चाहिए थे
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा ने भी केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर हमला बोला हैं। कमलनाथ ने तंज कसते हुए कहा कि गुजरात द्वारा कूनो राष्ट्रीय उद्यान में शेर नहीं भेजने पर लोगों का ध्यान बांटने के लिये अब अफ्रीका से चीते लाये गये हैं। कमलनाथ ने कहा, यहां कायदे से तो गिर के शेर आने चाहिए थे। जब मध्यप्रदेश में 17 दिसंबर 2018 से 22 मार्च 2020 तक कांग्रेस की सरकार थी और मैं मुख्यमंत्री था, तब मैंने इसे लेकर खूब प्रयास किए। मैंने इसे लेकर सरकार से बात भी की थी कि यहां पूरी तैयारी है। आप गिर के शेर भेज दीजिए, लेकिन उन्होंने शेर भेजने से मना कर दिया।