तेलंगाना और मिजोरम समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का एलान कर दिया गया। चुनाव आयोग के मुताबिक, मिजोरम में सात नवंबर और तेलंगाना में 30 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। राज्यों में चुनाव की तारीखों का एलान करने के बाद से ही वोटरों और नेताओं को अपने-अपने पाले में लामबंद करने की लड़ाई शुरू हो गई है। इस बीच, भाजपा के टिकट पर पिछले साल तेलंगाना में मुनुगोड विधानसभा उपचुनाव लड़ने वाले कोमाटिरेड्डी राज गोपाल रेड्डी ने बुधवार को पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। अब उनके कांग्रेस में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
अभी क्या है विधानसभा की स्थिति?
2018 के चुनाव के बाद 119 सदस्यीय विधानसभा में बीआरएस की 88, कांग्रेस की 19, आईएमआईएम की सात, टीडीपी की दो, भाजपा की एक, एआईएफबी की एक सीट थी। इसके अलावा एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली थी। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद हुए चार उपचुनावों में से तीन पर सत्ताधारी बीआरएस ने जीत दर्ज की। पहले इनमें से तीन सीटें उसके पास थी जबकि बीआरएस ने एक सीट कांग्रेस ने छीन ली। वहीं, एक सीट भाजपा ने बीआरएस की कब्जाई। इसके अलावा कांग्रेस के 12 विधायकों के बीआरएस में शामिल होने से पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ गई है। इस वक्त 119 सदस्यीय विधानसभा में बीआरएस के 101, एआईएमआईएम के सात, कांग्रेस के पांच और भाजपा के तीन विधायक हैं। दो सीट पर निर्दलीय विधायक हैं, जबकि एक सीट अभी खाली है।
इस चुनाव में किसकी तैयारी कैसी है?
2018 में तेलंगाना के चुनाव सात दिसंबर को हुए थे। ऐसे में चुनावों को अब कुछ ही वक्त बचा है। इस चुनाव में बीआरएस के सामने अपनी सत्ता सुरक्षित रखने की चुनौती होगी। वहीं, केंद्र की सत्ताधारी भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल अपने प्रदर्शन को मजबूत करने को देखेंगे।