कोलकाता मेट्रो रेलवे ने स्मार्ट परिवहन प्रणाली के तहत अपने ट्रेनों में एक नई टिकाऊ ब्रेकिंग तकनीक 'रेजेनरेटिव ब्रेकिंग' को अपनाया है। इससे बिजली की बचत के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है। फिलहाल कोलकाता मेट्रो की 37 ट्रेनों (रैक) में यह प्रणाली लागू कर दी गई है।
कोलकाता मेट्रो रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए अपने ट्रेनों में एक नई टिकाऊ ब्रेकिंग तकनीक 'रेजेनरेटिव ब्रेकिंग' को अपनाया है। इससे न सिर्फ बिजली की बचत हो रही है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी काफी कमी आई है। यह जानकारी रविवार को मेट्रो रेलवे के एक अधिकारी ने दी।
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क्या है रेजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक?
रेजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक में ट्रेन जब ब्रेक लगाती है, तो उसके इलेक्ट्रिक मोटर उल्टी दिशा में काम करते हैं और ट्रेन की गतिज ऊर्जा को दोबारा विद्युत ऊर्जा में बदल देते हैं। सामान्य ब्रेकिंग में यह ऊर्जा गर्मी में बदलकर व्यर्थ हो जाती है, लेकिन इस तकनीक से वह ऊर्जा फिर से काम में लाई जा सकती है।
कितनी ऊर्जा बची और कितना पैसा?
वित्त वर्ष 2024-25 में इन 37 रैकों की तरफ से कुल 1.08 करोड़ यूनिट बिजली रेजेनरेट की गई, जिससे करीब 8.2 करोड़ रुपये की ऊर्जा लागत की बचत हुई है।
कितना कम हुआ कार्बन उत्सर्जन?
इस प्रणाली की वजह से 13,500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है, जो पर्यावरण के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि है।
कितना प्रतिशत ऊर्जा दोबारा पैदा हो रही है?
मेट्रो रेलवे की तरफ से किए गए अध्ययन में पाया गया है कि इस तकनीक से 17 से 20 प्रतिशत तक ऊर्जा दोबारा उत्पन्न की जा सकती है। कोलकाता मेट्रो के प्रवक्ता ने बताया कि यह तकनीक लंदन, टोक्यो और न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों की मेट्रो सेवाओं में भी उपयोग में लाई जाती है।
कोलकाता मेट्रो के अन्य हरित पहल
कोलकाता मेट्रो एक और पर्यावरण हितैषी कदम के तहत 4 मेगावॉट की 'एडवांस केमिकल सेल (एसीसी)' बैटरी स्टोरेज सिस्टम भी स्थापित कर रही है। यह भारतीय रेल में पहली बार किया जा रहा है। बैटरियों की आपूर्ति हो चुकी है और यह प्रणाली जुलाई 2025 के मध्य तक चालू हो सकती है। रेजेनरेटिव ब्रेकिंग से न सिर्फ ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि ब्रेक, पहियों और अन्य हिस्सों की घिसावट भी कम होती है। इससे रखरखाव का खर्च भी घटेगा।