कोबाड गांधी के संस्मरण 'फ्रैक्चर्ड फ्रीडम: ए प्रिज़न मेमॉयर' के अनुवाद के लिए अनघा लेले को यशवंतराव चव्हाण साहित्य पुरस्कार 2021 देने की घोषणा 6 दिसंबर को की गई थी। वहीं इसकी घोषणा के छह दिन बाद राज्य सरकार ने इस पुरस्कार को वापस लेने के का एलान किया, जिसके कारण विवाद खड़ा हो गया।
माओवादी विचारक कोबाड गांधी के संस्मरण के मराठी अनुवाद के लिए दिए गए पुरस्कार को वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले का भाषा सलाहकार समिति ने विरोध किया है। राज्य सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए बुधवार को महाराष्ट्र सरकार की भाषा सलाहकार समिति के प्रमुख लक्ष्मीकांत देशमुख ने अपने पद से इस्तीफा देने का एलान किया। वहीं दूसरी ओर, मराठी भाषा के मंत्री दीपक केसरकर ने इस मुद्दे पर सरकार का बचाव करते हुए कहा कि पुरस्कार देने का मतलब नक्सलवाद के लिए सरकार की स्वीकृति देना होगा।
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क्या है मामला
कोबाड गांधी के संस्मरण 'फ्रैक्चर्ड फ्रीडम: ए प्रिज़न मेमॉयर' के अनुवाद के लिए अनघा लेले को यशवंतराव चव्हाण साहित्य पुरस्कार 2021 देने की घोषणा 6 दिसंबर को की गई थी। वहीं इसकी घोषणा के छह दिन बाद राज्य सरकार ने इस पुरस्कार को वापस लेने के का एलान किया, जिसके कारण विवाद खड़ा हो गया।
भाषा सलाहकार समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत देशमुख ने दिया पद से इस्तीफा
वहीं, इस मामले में बुधवार को सरकार की भाषा सलाहकार समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत देशमुख ने विरोध में अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने मराठी भाषा के मंत्री दीपक केसरकर को एक पत्र लिखकर इसका एलान किया। केसरकर को लिखे अपने पत्र में लक्ष्मीकांत देशमुख ने कहा कि महाराष्ट्र ने कभी भी साहित्यिक पुरस्कारों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं देखा, सिवाय 1981 के जब विनय हार्डिकर की पुस्तक को तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था।
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पूर्व आईएएस अधिकारी लक्ष्मीकांत देशमुख ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कोबाड गांधी की किताब माओवादी हिंसा के प्रति सहानुभूति नहीं रखती है, लेकिन राज्य सरकार ने एकतरफा फैसला लिया। गौरतलब है कि बोर्ड के एक अन्य सदस्य विनोद शिरसाथ ने भी बुधवार को इस्तीफा दे दिया। वहीं, पुरस्कार चयन समिति के तीन सदस्यों डॉ प्रज्ञा दया पवार, नीरजा और हेरंब कुलकर्णी ने इसके विरोध में मंगलवार को राज्य साहित्य और संस्कृति बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था।