अमेरिका के एक रिसर्च जरनल में छपे लेख के मुताबिक 2015 तक भारत में 6.2 करोड़ लोगों को दिल से जुड़ी बीमारी हुई। इसमें से तकरीबन 2.3 करोड़ लोगों की उम्र 40 साल से कम है। यानी 40 फीसदी हार्ट के मरीजों की उम्र 40 साल से कम है। भारत के लिए ये आंकड़े अपने आप में चौंकाने वाले हैं। जानकार बताते हैं कि पूरी दुनिया में भारत में ये आंकड़े सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं। healthdata.org के मुताबिक प्रीमैच्योर डेथ यानी अकाल मृत्यु के कारणों में 2005 में दिल की बीमारी का स्थान तीसरा था।
लेकिन 2016 में दिल की बीमारी, अकाल मृत्यु का पहला कारण बन गया है। 10 -15 साल पहले तक दिल की बीमारी को अकसर बुजुर्गों से जोड़ कर देखा जाता था। लेकिन पिछले एक दशक में दिल से जुड़ी बीमारी के आंकड़े कुछ और कहानी कहते हैं। देश के जाने माने कार्डियोलॉजिस्ट और पद्मश्री से सम्मानित डॉक्टर एस सी मनचंदा के मुताबिक दरअसल देश के युवाओं का दिल कमजोर हो गया है। डॉक्टर मनचंदा फिलहाल दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में हैं, इससे पहले एम्स में कार्डियो विभाग के कई सालों तक हेड रह चुके हैं। उनके मुताबिक कमजोर दिल का कारण हमारा नए जमाने की जीवन शैली है।
देश के युवाओं में फैले 'लाइफ स्टाइल डिस्ऑर्डर' के लिए वो पांच कारणों को अहम मानते हैं-
•जीवन में तनाव
•खाने की गलत आदत
•कम्प्यूटर/ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर देर तक काम करना
•स्मोकिंग, तंबाकू, शराब की लत
•पर्यावरण का प्रदूषण
डॉक्टर मनचंदा के मुताबिक चाहे 29 साल के अमित हो या फिर 21 साल के वैष्णव दोनों ही मामलों में इन पांच में से एक वजह है उनके हार्ट अटैक की। अमित ने भी बीबीसी को बताया कि 22 साल की उम्र से वो सिगरेट पीते थे। 29 साल के होते होते होते वो एक चेन स्मोकर बन गए थे। लेकिन हार्ट अटैक आने के 2 साल बाद उन्होंने अब सिगरेट पीना छोड़ दिया है। पर दिल की बीमारी के लिए आज भी तीन दवाई रोज़ खानी पड़ती है। वैष्णव के बारे में ऐसी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन पढ़ने के उम्र में आजकल बच्चों में तनाव आम है। इतना ही नहीं छात्रों जीवन में खाने की गलत समय, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का पढ़ने के लिए घंटों तक इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है।
डॉक्टरों की मानें तो हार्ट अटैक का सबसे बड़ा लक्षण माना जाता है- सीने में तेज दर्द। अक्सर किसी फिल्मी दृश्य में जब कभी किसी को दिल का दौरा पड़ता है तो वो अपना सीना जोर से जकड़ लेता है, दर्द के मारे उनकी आंखों में घबराहट दिखने लगती है और वो जमीन पर गिर पड़ता है। हम सभी को लगता है कि दिल का दौरा पड़ने पर ऐसा ही एहसास होगा जैसे हमारे सीने को कुचला जा रहा है। ऐसी अनुभूति होती भी है, लेकिन हमेशा नहीं।
जब दिल तक खून की आपूर्ति नहीं हो पाती तो दिल का दौरा पड़ता है। आमतौर पर हमारी धमनियों के रास्ते में किसी तरह की रुकावट आने की वजह से खून दिल तक नहीं पहुंच पाता, इसीलिए सीने में तेज दर्द होता है। लेकिन कभी-कभी दिल के दौरे में दर्द नहीं होता। इसे साइलेंट हार्ट अटैक कहा जाता है। healthdata।org के मुताबिक आज भी दुनिया में अलग अलग बीमारी से मरने वाले वजहों में दिल की बीमारी सबसे बड़ी वजह है।
साल 2016 में अलग अलग बीमारी से मरने वालों में 53 फीसदी लोगों की मौत दिल की बीमारी की वजह से हुई। किन महिलाओं को हार्ट अटैक का सबसे अधिक खतरा? इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के डॉक्टर के. के. अग्रवाल के मुताबिक, "महिलाओं में प्री मेनोपॉज हार्ट की बीमारी नहीं होती।" इसके पीछे महिलाओं में पाए जाने वाले सेक्स हॉर्मोन हैं जो उन्हें दिल की बीमारी से बचाते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय में महिलाओं में प्री मेनोपॉज वाली उम्र में भी हार्ट अटैक जैसे बीमारियां देखी जा रही हैं।
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन के डॉ। श्रीनाथ रेड्डी के मुताबिक, "अगर कोई महिला स्मोकिंग करती है, या गर्भनिरोधक पिल्स का लंबे समय से इस्तेमाल करती रही है तो प्राकृतिक रूप से उसके शरीर की हार्ट अटैक से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।" डॉ. रेड्डी के मुताबिक मेनोपॉज के पांच साल बाद महिलाओं में भी हार्ट अटैक का खतरा पुरुषों के बराबर ही हो जाता है। कई तरह के शोध हैं जिसमें पाया गया है कि महिलाएं अकसर सीने में दर्द को नजरअंदाज कर देती हैं और इसलिए इलाज उनको देर से मिलता है।
हार्ट अटैक से बचने के लिए क्या करें?
डॉ मनचंदा के मुताबिक हार्ट अटैक के खतरे से बचने के लिए युवाओं को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की जरूरत है। उनके मुताबिक बहुत हद तक योग से ये बदलाव संभव है। वो योग को हार्ट अटैक से बचाव का सबसे कारगर तरीका मानते हैं। डॉ. मनचंदा कहते हैं, "योग से न सिर्फ तनाव दूर होता है बल्कि लोग शांत चित्त और ज्यादा एकाग्र होते हैं।"
हार्ट अटैक से बचना है तो ट्रांस फैट से बचें
इसके अलावा डॉक्टर मनचंदा के अनुसार युवाओं को दिल की बीमारी से बचाने के लिए सरकार को भी कुछ मदद करनी चाहिए। इस सवाल पर कि सरकार कैसे हार्ट अटैक रोक सकती है, डॉक्टर मनचंदा कहते हैं, "जंक फूड पर सरकार को ज्यादा टैक्स लगाना चाहिए, जैसे सरकार तंबाकू और सिगरेट पर लगाती है। साथ ही जंक फूड पर बड़े-बड़े मोटे अक्षरों में वॉर्निंग लिखना चाहिए। सरकार इसके लिए नियम बना सकती है।"
डॉक्टर मनचंदा की माने तो ऐसा करने से समस्या जड़ से खत्म तो नहीं होगी, लेकिन लोगों में जागरूकता जरूर बढ़ेगी। अक्सर ये भी सुनने में आता है कि हार्ट अटैक का सीधा संबंध शरीर के कोलेस्ट्रोल लेवल से होता है, इसलिए अधिक तेल में तला हुआ खाना न तो बनाएं न ही खाएं।
लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है?
डॉ. मनचंदा कहते हैं कोलेस्ट्रोल से नहीं लेकिन ट्रांस फैट से हार्ट अटैक में दिक्कत ज्यादा आ सकती है। ट्रांस फैट शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रोल को कम करता है और बुरे कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है। वनस्पति और डालडा ट्रांस फैट के मुख्य स्रोत होते हैं। इसलिए इनसे बचना चाहिए। जानकारों के मुताबिक इन तरीकों पर अमल कर युवा हार्ट अटैक के अटैक से बच सकते हैं।