लंबे समय तक राजस्थान की सियासत का चर्चित चेहरा और वर्तमान में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को भारतीय जनता पार्टी और एनडीए ने उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है।जगदीप धनखड़ राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी वकालत की है। 2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बनने के बाद से ममता बनर्जी के साथ विवादों को लेकर उनका नाम चर्चा में बना रहता है।
झुंझुनूं जिले के जाट परिवार में हुआ जन्म
जगदीप धनखड़ का जन्म झुंझुनूं जिले के गांव किठाना में साल 1951 में साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम गोकल चंद और मां का नाम केसरी देवी है। जगदीप अपने चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर आते हैं। 1979 में उनकी शादी सुदेश धनखड़ से हुई। उन दोनों की एक बेटी कामना है। जिसकी शादी कार्तिकेय वाजपेयी से हुई है।
राजस्थान विवि से की है पढ़ाई
उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव किठाना के ही सरकारी माध्यमिक विद्यालय से हुई थी। गांव से पांचवीं तक की पढ़ाई के बाद उनका दाखिला गरधाना के सरकारी मिडिल स्कूल में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने चित्तौरगढ़ के सैनिक स्कूल में भी पढ़ाई की। 12वीं के बाद भौतिकी में स्नातक करने के बाद जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विश्वविद्यालय से कानून की पढाई पूरी की थी। धनखड़ का चयन आईआईटी, एनडीए और आईएएस के लिए भी हुआ था, लेकिन उन्होंने वकालत को चुना। उन्होंने अपनी वकालत की शुरुआत भी राजस्थान हाईकोर्ट से की थी। वे राजस्थान बार काउसिंल के चेयरमेन भी रहे थे।
जनता दल से की राजनीति की शुरुआत
धनखड़ ने अपनी राजनीति की शुरुआत जनता दल से की थी। धनखड़ 1989 में झुंझनुं से सांसद बने थे। उन्हें 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया था। हालांकि जब 1991 में हुए लोकसभा चुनावों में जनता दल ने जगदीप धनखड़ का टिकट काट दिया तो वह पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए और अजमेर के किशनगढ से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर 1993 में चुनाव लड़ा और विधायक बने। 2003 में उनका कांग्रेस से मोहभंग हुआ और वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। 70 साल के जगदीप धनखड़ को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 30 जुलाई 2019 को बंगाल का 28वां राज्यपाल नियुक्त किया था।
हिंसा के लिए ममता सरकार को ठहराया था
साल 2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के तौर पर कार्यभार संभलाने के बाद जगदीप धनखड़ ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में अब तक के कार्यकाल में उनके और सीएम ममता बनर्जी के बीच में विवाद सामने आए। पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद राज्य में हुई राजनीतिक हिंसा के लिए धनखड़ ने सीधे तौर पर ममता सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। इसके अलावा उन्होंने 21 जून 2021 को उत्तर बंगाल दौरे के दौरान कहा था कि लोग मारे जा रहे हैं इन परिस्थितियों में मैं चुप रहने वाला गवर्नर नहीं हूं। इसके अलावा राज्य विश्विविध्यालय के कुलपति को लेकर शुरू हुए विवाद में भी कई बार उनके और सीएम ममता के बीच वाकयुद्ध हुआ।
टीएमसी ने की थी पद से हटवाने की कोशिश
इतना ही नहीं, दोनों के बीच टकराव इस कदर बढ़ चुका था कि टीएमसी ने राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें राज्यपाल पद से हटाने की सिफारिश भी की थी। टीएमसी के प्रतिनिधिमंडल ने संविधान की धारा 156 की उपधारा 1 का हवाला देते हुए कहा था कि उन्होंने संविधान का पालन नहीं किया, सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी नहीं माना इसलिए राज्यपाल को हटाने की अपील की है। हालांकि उन्हें नहीं हटाया गया था।
जगदीप धनखड़ सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि माने हुए वकील भी हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों में उनका नाम शुमार किया जाता है। वे राजस्थान की जाट बिरादरी आते हैं और राजस्थान में जाटों को आरक्षण दिलवाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इस समुदाय में धनखड़ की खासी साख है। भाजपा उनके जरिए जाटों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।