1992- आईपीएस की परीक्षा के दौरान ही उनकी मुलाकात मशहूर लेखर अमीश त्रिपाठी की बहन भावना से हुई थी। उस समय वही आईपीएस का पेपर ले रही थीं। इसके बाद दोनों ने 1992 में शादी कर ली। लेकिन भावना ने आईएएस की नौकरी छोड़ दी और एचआईवी समेत समाज कल्याण के लिए काम करने लगीं।
2009- यह वो साल था जब रॉय मुंबई के ज्वाइंट कमिश्नर बने थे। इससे पहले वह अहमद नगर के एसपी, इकॉनोमिक ऑफेंस विंग के डीसीपी, डीसीपी ट्रैफिक, डीसीपी जोन एक और नासिक के पुलिस कमिश्नर भी रह चुके थे।
2010-14- इस दौरान उन्होंने ही मुंबई में पहली बार साइबर क्राइम सेल की शुरुआत की थी और महिला सेल को बढ़ावा देने का काम भी किया था।
2016- वह साल 2000 से ही कैंसर की लड़ाई से लड़ रहे थे। लेकिन वह खुद को फिट रखने के लिए भी हर संभव प्रयास करते थे। साल 2016 के बाद से वह मेडिकल लीव पर थे, कैंसर के कारण वह धीरे धीरे डिप्रैशन में जा रहे थे। जो उनकी आत्महत्या का कारण बना।
सुलझाए थे ये बड़े हाई प्रोफाइल केस
- कसाब केस
- लैला खान मर्डर केस
- आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग केस
- जे.डे मर्डर केस
- विजय पलांडे केस
- उन्होंने ही आतंकी यासीन भटकल के 4 हजार ईमेल खंगाले थे
- दाऊद की संपत्ति कराई थी जब्त
हिमांशु ऐसे अकेले पुलिस अफसर थे जिन्हें जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त थी। यह सुरक्षा उन्हें ही दी जाती है जिनकी जान को खतरा होता है। मुंबई अंडरवर्ल्ड से दाऊद की डी कंपनी को उखाड़ फेंकने में उनका बहुत बड़ा हाथ था। जिस कारण उनकी जान को खतरा बढ़ गया था। बता दें जेड प्लस सिक्योरिटी मुख्यमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों को ही दी जाती है। इसमें 36 सुरक्षाकर्मी होते हैं, जिसमें 10 एनएसजी, एसपीजी कमांडो होते हैं। बाकी पुलिस दल के ही लोग होते हैं।